चित्तौड़गढ़। राज्य के चित्तौड़गढ़ स्थित सैनिक स्कूल में 28 अप्रैल से शुरु हुए ग्रुप स्तरीय अंतर सैनिक स्कूल फुटबॉल टूर्नामेंट 2025 का बुधवार को समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि स्कूल के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया थे। स्कूल की उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल पारुल श्रीवास्तव, सीनियर मास्टर ओंकार सिंह एवं प्रतियोगिता के संयोजक चंद्रप्रकाश गोयल ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। समारोह स्कूल के एथलेटिक ग्राउंड में हुआ जहां मुख्य अतिथि ने आधिकारिक तौर पर टूर्नामेंट के समापन की घोषणा की।
स्कूल के जनसंपर्क अधिकारी बाबू लाल शिवरान ने बताया कि इस प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान सहित 6 सैनिक स्कूलों से 64 लड़कियों सहित कुल 224 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस ग्रुप स्तरीय प्रतियोगिता में सैनिक स्कूलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। प्रतियोगिता के सब जूनियर अंडर-15 (बालक) वर्ग में सैनिक स्कूल रीवा का कैडेट अर्श सिंह, जूनियर अंडर-17 (बालक) वर्ग में सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ का कैडेट कन्हैया बेस्ट प्लेयर रहें। जूनियर अंडर-17 गर्ल्स वर्ग में सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ की कैडेट नीतू कुमारी बेस्ट प्लेयर रही। प्रतियोगिता में बेस्ट गोलकीपर सब जूनियर अंडर-15 (बालक) वर्ग में सैनिक स्कूल अमेठी का कैडेट दिव्यांश यादव, जूनियर अंडर-17 (बालक) वर्ग में सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ का कैडेट गौरव जाखड़ रहें। जूनियर अंडर-17 गर्ल्स वर्ग में सैनिक स्कूल रीवा की कैडेट वैभवी त्रिपाठी बेस्ट गोलकीपर रही। इस प्रतियोगिता के जूनियर अंडर-17 (बालक) वर्ग में सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ प्रथम, सैनिक स्कूल अमेठी द्वितीय एवं सैनिक स्कूल मैनपुरी तृतीय स्थान पर रहा। जूनियर अंडर-17 गर्ल्स वर्ग में सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ प्रथम, सैनिक स्कूल अमेठी द्वितीय एवं सैनिक स्कूल मैनपुरी तृतीय स्थान पर रहा। सब जूनियर अंडर-15 (बालक) वर्ग में सैनिक स्कूल रीवा प्रथम, सैनिक स्कूल अमेठी द्वितीय एवं सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ तृतीय स्थान पर रहा।
मुख्य अतिथि ने सभी प्रतिभागियों को उनके समर्पण, खेल भावना और मीट के दौरान प्रदर्शित की गई सौहार्दपूर्ण भावना के लिए बधाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों को कहा कि खेल सिर्फ शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, यह मानसिक विकास और सामाजिक मेल-जोल का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। खेल हमें अनुशासन, धैर्य, और संघर्ष करने की क्षमता सिखाते हैं। प्रतियोगिता में जीत और हार जीवन के अनुभव हैं, जो हमारे व्यक्तित्व को और मजबूत बनाते हैं। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया कि वे खेल को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं और निरंतर मेहनत करें। प्रतियोगिता में रेफरी का कार्य शकील, जगदीश चंद्र, सूरज मीणा, शंकर खटीक, लोकेश बुनकर, सोहनलाल मेघवाल, राधेश्याम तेली, मोहित, अरशद खान, प्रदीप कीर ने किया।