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January 21, 2026, 12:40 pm
BIG NEWS : एमपी में जानलेवा बीमारी की एंट्री, न्यूरोलॉजिकल बीमारी से कांपा मालवा का नीमच-मंदसौर, जीबीएस पर विपक्ष का वार, उमंग सिंघार ने कहा- सरकार को पहले ही चेताया था, फिर भी नहीं जागी, पढ़े खबर

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नीमच। मध्य प्रदेश में दुर्लभ लेकिन जानलेवा गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के मामलों के सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। नीमच जिले के मनासा में दो बच्चों की मौत और मंदसौर जिले के गरोठ व सुवासरा में GBS मरीजों की पुष्टि ने हालात की गंभीरता को उजागर कर दिया है। इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए त्वरित और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि वे पहले ही सरकार को समय रहते चेतावनी दे चुके हैं कि GBS की आहट गंभीर खतरे का संकेत है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह मामले की गंभीरता को समझे और संबंधित विभागों को स्पष्ट व सख्त दिशानिर्देश जारी करे।

उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश में पानी की गुणवत्ता की सख्त निगरानी, स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट मोड पर रखना और मरीजों को त्वरित उपचार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इंदौर जल त्रासदी के बाद भी यदि ऐसी चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा। प्रदेश में किसी भी नई त्रासदी को रोकना सरकार की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है।

GBS क्या है और क्यों है खतरनाक?
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इस बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम परिधीय तंत्रिकाओं पर हमला कर देता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नता, झुनझुनी और गंभीर मामलों में पैरालिसिस तक हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार GBS आमतौर पर किसी संक्रमण के कुछ दिन या हफ्तों बाद उभरती है। यह न तो संक्रामक है और न ही वंशानुगत।

बचाव और सावधानियां-
GBS से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना, साफ व उबला हुआ पानी पीना, स्वच्छता बनाए रखना और किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद आवश्यक है। समय पर पहचान और सही इलाज से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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