नीमच। टाउन हॉल में आयोजित दिव्य सत्संग एवं आध्यात्मिक प्रवचन में राष्ट्र संत महोपाध्याय ललित प्रभ सागर जी महाराज ने जीवन जीने की कला पर प्रेरक और सारगर्भित उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में जो मिला है, जैसा मिला है, उसका आनंद लेना सीखें। शिकायत छोड़कर कृतज्ञता का भाव अपनाएं और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें।
महाराजश्री ने कहा कि अवसर सभी को मिलते हैं, आवश्यकता है तो केवल दृष्टिकोण बदलने की। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि आलोचना के स्थान पर अनुमोदना का भाव रखें और यह संकल्प लें कि शिकायत नहीं करेंगे, बल्कि आभार व्यक्त करेंगे। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच से जीवन खुशियों से भर जाता है और अभाव का रोना छोड़ देना चाहिए।
प्रवचन में उन्होंने कहा कि जीवन के उतार-चढ़ाव इस बात का प्रमाण हैं कि हम जीवित हैं। जीत का आनंद वही ले सकता है जो हार का स्वाद भी लेना जानता हो। उन्होंने कहा तस्वीर में हर कोई मुस्कुराता है, लेकिन जो तकलीफ में भी मुस्कुराए वही सच्चे अर्थों में जीवन जीता है। महाराजश्री ने प्रेरित करते हुए कहा, आज से प्रण करें आह-आह नहीं, वाह-वाह करेंगे।
बुजुर्गों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जिस घर में माली नहीं होता, वह बगीचा उजड़ जाता है और जिस घर में बुजुर्ग नहीं होते, वह परिवार बिखर जाता है।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान भीडभंजन पार्श्वनाथ के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुई तथा समापन मंगल पाठ के साथ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर सत्संग का लाभ लिया।
आयोजकों ने बताया कि 13 फरवरी को टाउन हॉल में महाराजश्री “घर को कैसे स्वर्ग बनाएं” विषय पर अगला दिव्य सत्संग देंगे। उल्लेखनीय है कि राष्ट्र संत ललित प्रभ सागर जी महाराज के प्रवचनों से देश के 21 राज्यों में लाखों लोग लाभान्वित हो चुके हैं तथा वे अब तक 55 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर चुके हैं।