खनियांधाना। बुंदेलखंड की पावन धरा पर आयोजित भव्य पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन श्गर्भ कल्याणकश् की क्रियाएं अपार उत्साह और भक्ति के साथ संपन्न हुईं। मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज एवं मुनि 108 श्री निरापद सागर जी महाराज के सानिध्य में पूरी श्अयोध्या नगरीश् आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आई। प्रातःकाल भगवान के अभिषेक के पश्चात मुनिश्री ने अपनी मंगल देशना में बताया कि तीर्थंकर के अवतरण से पूर्व ही संपूर्ण वातावरण मंगलमय हो जाता है।
दोपहर के सत्र में माता मरुदेवी की गोद भराई की रस्म अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने मंगल गीतों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए। महोत्सव के दौरान माता को आए 16 दिव्य स्वप्नों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर विशेष आकर्षण के रूप में 56 कुमारियों एवं अष्ट कुमारियों द्वारा माता की अष्टधा पूजन और मंगल गान के साथ की गई सेवा की मनोहारी प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। सायंकाल मुनिश्री ने शंका समाधान कार्यक्रम के माध्यम से जिज्ञासु भक्तों का मार्गदर्शन किया। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, खनियांधाना में बह रही धर्म की यह गंगा दिन-प्रतिदिन भव्यता की नई ऊंचाइयों को छू रही है।