नीमच। ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर गुरुवार को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर नीमच जिले में भी जोरदार रूप से देखने को मिला। जिले के 28 श्रमिक, कर्मचारी एवं किसान संगठनों ने एकजुट होकर विशाल रैली निकालते हुए केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार संजय मालवीय को ज्ञापन सौंपा।
नीमच में रैली गांधी वाटिका से प्रारंभ होकर फोर जीरो भारत माता चौराहा, घंटाघर, बारादरी और कमल चौक मार्ग से होती हुई पुनः फोर जीरो चौराहा पहुंची, जहां सभा आयोजित की गई। प्रदर्शनकारियों ने श्रमिक अधिकार, किसान हित, सामाजिक सुरक्षा एवं रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
संयुक्त मोर्चा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में चारों श्रम संहिताओं को निरस्त करने, ठेका एवं आउटसोर्स व्यवस्था पर रोक लगाने, श्रम शक्ति नीति-2025 का प्रारूप वापस लेने तथा सभी श्रेणियों के श्रमिकों के लिए 26 हजार से 40 हजार तक राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन तय करने की मांग की गई। इसके साथ ही असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम 10 हजार मासिक पेंशन, पुरानी पेंशन योजना की बहाली एवं निजीकरण पर रोक की मांग भी उठाई गई।
संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी फसलों पर कानूनी गारंटी के साथ एमएसपी लागू करने, कृषि इनपुट पर राहत, बीज नीति पर पुनर्विचार, व्यापक ऋण माफी एवं फसल बीमा योजना के दायरे के विस्तार की मांग रखी। ज्ञापन में मनरेगा के विस्तार, शहरी रोजगार गारंटी कानून लागू करने, महंगाई पर नियंत्रण, आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी समाप्त करने तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने की मांग भी शामिल रही।
मध्यप्रदेश से जुड़े मुद्दों में श्रम कानूनों में किए गए संशोधन वापस लेने, सीसीआई नयागांव सीमेंट फैक्ट्री नीमच को सरकारी क्षेत्र में संचालित रखने, खदानों की बिक्री रोकने एवं मजदूरों का बकाया वेतन तत्काल दिलाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
आयोजकों ने चेतावनी दी कि यदि श्रमिक एवं किसान विरोधी नीतियों में बदलाव नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर तेज किया जाएगा। हड़ताल एवं रैली में सीटू, इंटक, बैंक कर्मचारी संघ, आंगनवाड़ी, आशा, मध्यान्ह भोजनकर्मी, सीमेंट एवं बिजली कर्मचारी यूनियन सहित अनेक संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही।