चित्तौड़गढ़। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी, हिन्दुस्तान जिंक ने सीएसआर पहल के तहत ग्रामीण और कृषि विकास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी ने अपने चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स के पास बिलिया गांव में अनूठी लिफ्ट सिंचाई तकनीक स्थापित कर 125 एकड़ कृषि भूमि को नया जीवन दिया है। इस परियोजना से गांव के 100 से अधिक किसान परिवारों की जीवनशैली में सुधार आया है।
इस तकनीक के माध्यम से निचले इलाकों से पानी को ऊपरी कृषि क्षेत्रों तक पहुँचाया जाता है, जिससे पूरे साल सिंचाई संभव हो जाती है। पहले, सिंचाई की कमी के कारण यह भूमि गर्मियों में उपज के लिए उपयुक्त नहीं रहती थी। अब, भरोसेमंद जल आपूर्ति से किसान गेहूं, ज्वार और उच्च मूल्य वाली नकदी फसलें उगा सकते हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ी है और आय में सुधार हुआ है।
बिलिया गांव के किसान जीतमल कुमावत ने कहा, “नई लिफ्ट सिंचाई प्रणाली ने खेती करने का तरीका बदल दिया है। अब पानी खेतों के हर हिस्से तक आसानी से पहुँच रहा है, जिससे गेहूँ, ज्वार और नकदी फसलें उगाना आसान हो गया है। हम कंपनी के वैज्ञानिक और कारगर प्रयासों की सराहना करते हैं।”
यह परियोजना हिन्दुस्तान जिंक की सस्टेनेबल कृषि विकास पहल का हिस्सा है। इसके तहत जलवायु-अनुकूल खेती, मिट्टी व जल संरक्षण, पशुधन विकास और बाजार संपर्क को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में यह समाधान राजस्थान के छह जिलों दृ उदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और अजमेर में लगभग 35,000 किसान परिवारों को लाभ पहुंचा रहा है।
कृषि के अलावा, हिन्दुस्तान जिंक शिक्षा, ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए स्थायी आजीविका, स्वास्थ्य सेवाएं, कला-संस्कृति, स्वच्छता और खेलकूद जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय योगदान दे रहा है। कंपनी के सामुदायिक विकास प्रयासों से करीब 2,400 गांवों में 23 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं।
भारत की शीर्ष 10 सीएसआर कंपनियों में शामिल हिन्दुस्तान जिंक की यह पहल राजस्थान में समावेशिता, नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देने के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।