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April 1, 2026, 6:40 pm
POST NEWS: दिलीप छाजेड़ की कलम से- कहना तो बनता है.., देहदान पर बड़ा सवाल,  अपील करने वाले पहले खुद क्यों नहीं बनते उदाहरण?

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कोरोना काल के पश्चात जिस प्रकार से चिकित्सक (डॉक्टर) समाज की जरूरत किसी एक वर्ग विशेष ही नहीं पृथ्वी पर रहने वाले संपूर्ण मानव समाज को अति आवश्यक महसूस हुई और उसी का परिणाम है कि संपूर्ण विश्व के साथ-साथ भारत के भी अनेकों जिलों में मेडिकल कॉलेज के माध्यम से एक विशाल मात्रा में धरती के दूसरे भगवान डॉक्टर की शिक्षा प्रारंभ की गई और जिस प्रकार से मेडिकल कॉलेज स्थापित हो रहे हैं, उसमें इस प्रकार से देहदान की मात्रा भी बढ़ने लगी 
 
भारत में अनेक क्लब, सामाजिक संगठन और समाज सेवा के क्षेत्र में जुड़े हुए संगठन, अधिकतर सनातन धर्म के लोगो को देहदान के लिए भारत के बड़े वर्ग को प्रेरित करते हैं और देहदान का प्रचलन बढ़ भी रहा है 

आज मन की बात 
जिस हिसाब से हमारे देश के सामाजिक, धार्मिक और अनेक क्लब के सदस्य देहदान की अपील करते हुए संकल्प पत्र भरने का आह्वान करते हैं, उन संस्थाओं के पदाधिकारी और तमाम सदस्यों को जन जागरण के लिए पहले स्वयं के और अपने परिजनों के देहदान के संकल्प पत्र भरकर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, अगर वह ऐसा नहीं कर सकते तो अन्य सनातनी देहो का पंचतत्व की शास्त्र सम्मत परंपरा के अनुसार ही अंत्येष्टि कर्म होने दें, यही आग्रह दिवंगत सामान्य जन के नेत्रदान को लेकर भी है, बात कड़वी लग सकती है, मगर देहदान और नेत्रदान की पहल केवल सनातनी समाज से ही क्यों, अन्य धर्म के अनुयायियों से क्यों नहीं 

अब एक और प्रश्न जो मन पूछता है कि पूर्व में बने हुए डॉक्टर रूपी भगवान और वर्तमान में भी लाखों युवा जिसमें समस्त धर्म हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई के बच्चे डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं और उनका लक्ष्य सेवा करते हुए आमजन की जान बचाने का होता है जो पढ़ाई वह कर रहे हैं उसके लिए उनको सभी क्षेत्र के डॉक्टरी करने हेतु एक देहदान की जरूरत होती है, जिसको पूर्व में बताए गए सामाजिक, धार्मिक, क्लब के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है क्या यह पढ़ाई करने वाले वर्तमान पीढ़ी के सभी युवा देहदान की घोषणा करेंगे?

अगर यह लोग अपनी देह का दान नहीं करते हैं तो फिर दूसरों की देह पांच तत्व मैं विलीन नहीं करते हुए क्यों दे दी जाए? या फिर कोई ऐसा माध्यम निकाला जाए की सनातनी की देह सनातनी को, और अन्य धर्म की देह अन्य धर्म के माध्यम से मेडिकल कॉलेज में देकर उन धर्म के लोगों को डॉक्टर बनाया जाए

वर्तमान भौतिक समय में विज्ञान ने जो तरक्की की है, और अब तो ai के माध्यम से विज्ञान ने जो तरक्की की है, अब डॉक्टरी करने के लिए देह की जरूरत भी नहीं होती है, मानव शरीर के प्रत्येक अंग को ए आई के माध्यम से बनाकर रिसर्च किया जा सकता है 

दिलीप छाजेड़

पूर्व बजरंग दल नगर संयोजक

जिला नीमच मध्य प्रदेश

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