BREAKING NEWS
NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<     BIG NEWS : त्योहारों में मिठाई खरीदने से पहले हो.. <<     NEWS : पंचायत समिति सदस्य चुनाव, जिले की छह.. <<     BIG REPORT : पुलिस चौकी के सामने चेकिंग में व्यस्त.. <<     KHABAR : स्वास्थ्य विभाग के कामकाज का होगा पूरा.. <<     BIG NEWS : शतरंज की चालों से निखर रही विद्यार्थियों.. <<     KHABAR : मनासा में ट्रैक्टर ने कार को मारी जोरदार.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     BIG NEWS : नीमच के व्यस्त चौराहे पर थम गई रफ्तार,.. <<     KHABAR : बुन्देली गायक सुनील लोधी की आंखों का इलाज.. <<     REPORT : गरोठ में मिलावट के शक पर प्रशासन का बड़ा.. <<     BIG REPORT : अवैध मदिरा कारोबार के खिलाफ आबकारी.. <<     KHABAR : सांदीपनि विद्यालय जावद में कलेक्टर.. <<     KHABAR : दोहरे हत्याकांड में खाकी की थ्योरी.. <<     BIG NEWS : मध्यप्रदेश कांग्रेस सेवादल की नई.. <<     KHABAR : बच्चों की सुरक्षा के लिए न्यायिक टीम.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
April 9, 2026, 10:45 am
NEWS : अनुष्ठान आराधिका महासती डॉ. कुमुद लता के सान्निध्य में बह रही धर्म आराधना की गंगा, डॉ. पदम कीर्ति ने कहा- चित्त कृतज्ञता और साधना में लगाएं तो यही जीवन ईश्वर का एक मधुर प्रसाद बन जाए, पढ़े संजय खाबिया की खबर

Share On:-

चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ में अक्षय तृतीया पर्व पर पारणा महोत्सव को सानिध्य प्रदान करने प्रवासरत अनुष्ठान आराधिका महासती डॉ कुमुद लता जी , स्वर साम्राज्ञी साध्वी डॉ महाप्रज्ञा, वास्तु शिल्पी साध्वी डॉ पदम कीर्ति और विद्याभिलाषी साध्वी राज कीर्ति साध्वी मंडल के सानिध्य में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान और आयोजन हो रहे हैं। जिनमें आसपास के क्षेत्र के अलावा देश के सुदूरस्त क्षेत्रों से धर्मावलंबियों व श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि अनुष्ठान आराधिका महासती डॉ कुमुद लता जी के दर्शन की झलक और आशीष पाने के लिए श्रद्धालुओं मैं अपार उत्साह है। 
दिवाकर स्वाध्याय भवन में विशेष भेंट के दौरान वास्तु शिल्पी साध्वी डॉ पदम कीर्ति ने
भक्ति और शक्ति की नगरी चित्तौड़गढ़ नाम की सार्थकता स्वरूप चित्त की अवस्था पर सारगर्भित चिंतन द्वारा चित्त की दिशा से  जीवन के रूपांतरण का मार्ग बताया।
उन्होंने बताया कि मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति उसका चित्त है। चित्त का सरल अर्थ है—हमारा मन, हमारी चेतना और आत्मा की वह जागरूक अवस्था जो निरंतर सक्रिय रहती है। महापुरुषों का कहना है कि जिसका चित्त शांत है, उसका जीवन श्रेष्ठ है, किंतु जिसका चित्त अशांत है, उसके पास भौतिक सुख-सुविधाओं और वैभव का अंबार होने के बावजूद सब कुछ व्यर्थ है।
डॉ पदम कीर्ति ने कहा कि अक्सर हमारे मन में यह प्रश्न उठता है कि हमारा चित्त इतना भटकता क्यों है और इसे सही दिशा में कैसे लगाया जाए? इसका सीधा सा उत्तर यह है कि चित्त हमेशा वहीं जाता है जहाँ उसे सुख की अनुभूति होती है। यदि हम इस नश्वर संसार में सुख ढूँढेंगे, तो हमारा चित्त बाज़ार की चकाचौंध में भटकेगा। यदि हम मान-प्रतिष्ठा में सुख मानेंगे, तो चित्त केवल लोगों की झूठी प्रशंसा में उलझा रहेगा। लेकिन, यदि हम भक्ति और अंतरात्मा में सुख खोजेंगे, तो चित्त स्थिरता को प्राप्त कर सकेगा।
अक्सर लोग शरीर से तो मंदिर पहुँच जाते हैं, लेकिन उनका चित्त व्यापार या घर की चिंताओं में रहता है। ऐसे दर्शन से शांति नहीं मिलती। वास्तविक शांति तभी संभव है जब शरीर के साथ-साथ चित्त भी प्रभु के चरणों में समर्पित हो।
उन्होंने कहा जीवन को सार्थक बनाने के लिए हमें यह समझना होगा कि चित्त को कहाँ नहीं लगाना चाहिए। हमें अपने चित्त को शिकायत, तुलना और आलोचना से बचाना होगा।
शिकायत का अर्थ है—जो हमारे पास है उसे स्वीकार न करना। शिकायत करने वाला व्यक्ति हर परिस्थिति में कमी ही खोजता है, जिससे उसका चित्त भारी हो जाता है और जीवन से कृतज्ञता समाप्त हो जाती है। इसी प्रकार, तुलना अशांति का दूसरा नाम है। दूसरों की सुख-सुविधाओं को देखकर अपने जीवन को कमतर आंकना केवल ईर्ष्या और हीनता को जन्म देता है। वहीं, आलोचना की आदत हमारे समय को नष्ट करती है और मन में कड़वाहट भर देती है। दूसरों की चर्चा करने से हमारा आत्मबल घटने लगता है।
इसके विपरीत, यदि हम अपने चित्त को कृतज्ञता, साधना और आत्मचिंतन की ओर मोड़ दें, तो जीवन का कायाकल्प हो सकता है। कृतज्ञता की शुरुआत सुबह उठते ही ईश्वर, माता-पिता, गुरु और अपने शरीर को धन्यवाद देने से होनी चाहिए। याद रखें, "धन से घर भरता है, लेकिन धन्यवाद से हृदय भरता है।"
साध्वी डॉ पदम कीर्ति ने कहा स्वयं को सुधारने का निरंतर प्रयास करना है। प्रतिदिन थोड़ा समय मौन रहना और आत्मपरीक्षण करना ही सच्ची साधना है। दिन के अंत में खुद से यह पूछना कि आज मैंने क्या अच्छा किया और किसे दुःख पहुँचाया, हमें परमात्मा के निकट ले जाता है।
उन्होंने आत्म कल्याण की राह प्रशस्त करते हुए बताया यह हमारे विवेक पर निर्भर है कि हम अपने चित्त का उपयोग कैसे करते हैं। यदि हम इसे शिकायत और आलोचना में उलझाएंगे, तो जीवन बोझ और कड़वाहट बन जाएगा। परंतु, यदि हम इसे कृतज्ञता और साधना में लगाएंगे, तो यही जीवन ईश्वर का एक मधुर 'प्रसाद' बन जाएगा।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE