चित्तौड़गढ़। ब्रह्माकुमारी संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी जी की प्रथम पुण्यतिथि श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संस्था की मुख्य सेवा केंद्र संचालिका मधु दीदी ने दादी जी के जीवन एवं उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
मधु दीदी ने बताया कि दादी रतन मोहिनी जी का मूल नाम लक्ष्मी था। वे अल्पायु में ही ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़ गईं और अपना संपूर्ण जीवन विश्व कल्याण की सेवा में समर्पित कर दिया। वे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहीं तथा अपनी दिव्य दृष्टि एवं ज्ञान से अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती रहीं।
उन्होंने कहा कि दादी जी ने लगभग 100 वर्ष की आयु प्राप्त कर शतायु जीवन जिया और अनेक आत्माओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। अपनी मधुर मुस्कान एवं सकारात्मक ऊर्जा से वे सभी का मन मोह लेती थीं। उनके त्याग, तपस्या और सेवा भाव से लाखों लोगों ने अपने जीवन को ईश्वरीय कार्यों की ओर मोड़ा।
सेवा केंद्र संचालिका राजयोगिनी आशा दीदी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बताया कि दादी जी ने वर्ष 1985 में यूथ विंग की शुरुआत की थी, जिससे युवाओं को राजयोग की शिक्षा दी गई। उन्होंने अनेक पदयात्राएं कीं तथा कन्याओं को राजयोग प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाने का कार्य किया। इस अभियान के तहत 50,000 से अधिक ब्रह्माकुमारी बहनें आज ईश्वरीय सेवाओं में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।
दादी जी की पुण्यतिथि पर मुख्यालय माउंट आबू में भी श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया, जिसमें ब्रह्माकुमारी संस्थान के सदस्य एवं अनुयायी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और उनके योगदान को नमन किया। कार्यक्रम में उनके आदर्शों एवं सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया।