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May 25, 2026, 7:10 pm
KHABAR : आर्यिका माताजी की दुर्घटना पर सिंगोली में जैन समाज का आक्रोश, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, उच्चस्तरीय जांच की मांग, पढे़ मेहबूब मेव की खबर

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सिंगोली। दिनांक 20 मई 2026 को रीवा जिला मुख्यालय में कलेक्ट्रेट भवन के सामने राष्ट्र संत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका श्री 105 श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका श्री 105 उपशममति माताजी का कार दुर्घटना में दुखद समाधि मरण हो गया था। इस घटना को लेकर सकल जैन समाज, सिंगोली में गहरा रोष व्याप्त है।


आज सोमवार को समाजजनों ने कमल चौक से तहसील कार्यालय तक विशाल मौन जुलूस निकाला। ज्ञापन से पूर्व आर्यिका माताजी को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद एडवोकेट संजय नागोरी ने ज्ञापन का वाचन किया। तहसीलदार प्रेमशंकर पटेल को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व गृह मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।


ज्ञापन में समाज ने कहा  
यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना भर नहीं मानी जा सकती। उपलब्ध तथ्यों एवं वीडियो क्लिपों के आधार पर समाज में गहरी आशंका एवं चिंता का वातावरण निर्मित हुआ है। जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक व पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं। ऐसे संतों के साथ निरंतर बढ़ती दुर्घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं।


सकल जैन समाज की 5 प्रमुख मांगें:
1. निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच: SIT अथवा न्यायिक जांच कराई जाए। सभी CCTV, वीडियो व डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं। दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही हो।
2. 2. संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हो: विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक, हाईवे व भीड़भाड़ क्षेत्रों में विशेष सावधानी सुनिश्चित की जाए।
3. राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बने: भारत सरकार पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय Guideline, सुरक्षा SOP व संवेदनशील मार्गों हेतु विशेष प्रावधान निर्मित करे।
4. संतों के विरुद्ध अपराध विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखे जाएं: क्योंकि साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते, वाहन या सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते तथा पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं।
5. प्रशासन एवं समाज के बीच समन्वय तंत्र बने: स्थानीय स्तर पर "Sant Security Coordination Cell" एवं आपातकालीन संपर्क व्यवस्था निर्मित की जाए।


समाज का संदेश: 
ज्ञापन में कहा गया कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। हमारा उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना एवं तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।


"जो स्वयं निहत्थे होकर भी मानवता को अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं, उनकी सुरक्षा करना समाज और शासन-दोनों का नैतिक दायित्व है। संत सुरक्षा केवल एक समाज का विषय नहीं, भारत की आध्यात्मिक विरासत की सुरक्षा का प्रश्न है।"


मौन जुलूस में आस-पास के बोराव,थड़ोद,झांतला,धनगांव,करवाया,धारड़ी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, पुरुष आदि सकल जैन समाज के संगठन पदाधिकारी एवं  समाजजन उपस्थित थे। महिलाएं बच्चे हाथों में तख्तियां लेकर चल रहे थे।

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