चित्तौड़गढ़। मानवता, सेवा और सामाजिक सरोकारों की मिसाल पेश करते हुए श्री ओसवाल संघ, चित्तौड़गढ़ ने खातर महल के समर्पित सेवादार स्वर्गीय भंवरलाल कुलमी को अनूठे अंदाज में श्रद्धांजलि अर्पित की। लगभग 35 वर्षों तक जैन समाज के भवन ष्खातर महलष् में निस्वार्थ भाव से सेवाएं देने वाले भंवरलाल कुलमी का 4 जून 2026 को हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया था।
स्वर्गीय भंवरलाल कुलमी मूलतः ग्राम मादड़ा, तहसील डूंगला के निवासी थे। उनके निधन के बाद श्री ओसवाल संघ ने उन्हें परिवार का सदस्य मानते हुए उनके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव पहुंचाने की व्यवस्था की। इस दौरान संघ अध्यक्ष राजेश सेठिया, कोषाध्यक्ष संपत डांगी तथा वरिष्ठ सदस्य कमल बोहरा और नारायण बलदवा उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा समाज-
स्व. भंवरलाल कुलमी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में जैन समाज सहित विभिन्न समाजों के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके सरल स्वभाव, समर्पण और सेवा भावना को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। संघ अध्यक्ष राजेश सेठिया ने भंवरलाल कुलमी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में सेवा को ही धर्म माना और समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।
सभा को श्रमण संघ अध्यक्ष किरण डांगी, साधुमार्गी संघ अध्यक्ष शंकर सुराना, शांतक्रांत संघ मंत्री पारस सोनी, महावीर इंटरनेशनल अध्यक्ष अभयसिंह संचेती, जैन दिवाकर संगठन समिति मंत्री सुधीर जैन, वरिष्ठ श्रावक गौतम पोखरना, हस्तीमल पोखरना, वरिष्ठ पत्रकार राकेश पटवारी, प्रकाश नाहर, मनीष छाजेड़, सांवरमल बोलिया, आदित्येन्द्र सेठिया, मनसुख पटवारी, स्मिता तरावत, मधु नवाल, रंजीत लोट तथा राजू सेन सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने संबोधित किया।
परिवार के लिए जुटाए 61 हजार रुपये-
श्रद्धांजलि सभा की सबसे विशेष बात रही समाज द्वारा स्वैच्छिक सहयोग से स्वर्गीय भंवरलाल कुलमी के परिवार के लिए आर्थिक सहायता जुटाना। संघ के आह्वान पर उपस्थित लोगों ने तत्काल सहयोग करते हुए 61 हजार रुपये की राशि एकत्रित की, जिसे परिवार को सहायता स्वरूप भेंट किया गया। सामाजिक दृष्टि से यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि किसी निस्वार्थ सेवादार के सम्मान में समाज का इस प्रकार एकजुट होकर श्रद्धांजलि देना और आर्थिक सहयोग करना अपने आप में प्रेरणादायी उदाहरण है।
सेवा ही सच्ची पूजा का दिया संदेश-
कार्यक्रम का संचालन संघ संरक्षक प्रो. सी.एम. रांका ने किया, जबकि अंत में संघ मंत्री शंकर सुराना ने सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज के लिए समर्पित व्यक्ति केवल अपने परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सदस्य होता है। स्वर्गीय भंवरलाल कुलमी की 35 वर्षों की सेवा ने यह सिद्ध कर दिया कि ष्सेवा ही सच्ची पूजा हैष् और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं। इस अनूठी पहल ने पूरे नगर में सामाजिक एकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों की नई मिसाल कायम की है।