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July 6, 2026, 4:59 pm
KHABAR : वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर हारुन रशीद कुरैशी ने उठाए सवाल, कहा- सरकार की नीयत धार्मिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप की, फैसला वापस लेने की मांग, पढ़े खबर 

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नीमच। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन में पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति किए जाने पर समाजसेवी एवं पूर्व पार्षद हारुन रशीद कुरैशी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह निर्णय सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है और वक्फ जैसी धार्मिक संस्था की स्वायत्तता में हस्तक्षेप का प्रयास है।

कुरैशी ने कहा कि वक्फ इस्लामी शरीयत और धार्मिक आस्था के अनुरूप संचालित होने वाली व्यवस्था है। इसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना इसके मूल स्वरूप के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार इसे पारदर्शिता और समावेशिता का नाम दे रही है, जबकि यह मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों में दखल देने जैसा कदम है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में सभी धार्मिक संस्थाओं में समान नीति लागू करना चाहती है, तो क्या देवस्थानम बोर्ड, तिरुपति देवस्थानम या शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) जैसे अन्य धार्मिक संस्थानों में भी अन्य धर्मों के सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। यदि ऐसा नहीं है, तो केवल वक्फ बोर्ड को ही इस नीति के दायरे में क्यों लाया जा रहा है।

प्रेस बयान में आरोप लगाया गया कि सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार नहीं, बल्कि उन पर प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियां मुस्लिम समाज द्वारा धार्मिक उद्देश्यों के लिए दान की गई संपत्तियां हैं, जिनका संचालन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।

हारुन रशीद कुरैशी ने राज्य सरकार से वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन पर पुनर्विचार करते हुए इस निर्णय को वापस लेने तथा मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग की।

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