चित्तौड़गढ़। ग्राम नरपत की खेड़ी में नगर विकास न्यास (यूआईटी), चित्तौड़गढ़ द्वारा काटे जा रहे आवासीय भूखंडों की योजना का ग्रामीणों ने विरोध किया। योजना को निरस्त करने तथा संबंधित भूमि को पुनः गोचर भूमि के रूप में सुरक्षित रखने की मांग को लेकर ग्रामीणों एवं महिलाओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि गांव में बड़ी संख्या में गरीब परिवार निवास करते हैं और उनके पशुधन के लिए गोचर भूमि अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना है कि आवासीय भूखंडों की लॉटरी के माध्यम से किए जा रहे आवंटन को तत्काल निरस्त कर भूमि को पुनः गोचर के रूप में सुरक्षित किया जाए, ताकि पशुधन के साथ ग्रामीणों के रोजगार एवं गांव के भविष्य की रक्षा हो सके।
ज्ञापन में ग्राम नरपत की खेड़ी की 215 बीघा भूमि को गोचर भूमि के रूप में दर्ज करने की मांग भी की गई। ग्रामीणों ने यूआईटी चित्तौड़गढ़ द्वारा की जा रही कार्रवाई को तीन दिन के भीतर बंद करने की मांग रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर रोड जाम, बाजार बंद, धरना-प्रदर्शन सहित आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद-
ज्ञापन सौंपने के दौरान गौशाला अध्यक्ष शिवरतन सालवी, वर्तमान वार्ड मेंबर हनुमान चौबीसा, पूर्व सरपंच रतनजी सुथार, पूर्व वार्ड मेंबर पन्नालाल पालीवाल, मदन वैष्णव, शुभम सालवी, पवन सालवी, प्रेम माली, नानालाल माली, मोतीलाल माली, प्रकाश पुरोहित, रामलाल चौबीसा, मदन चौबीसा एवं सुनील तेली सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से नरपत की खेड़ी की गोचर भूमि को सुरक्षित रखने तथा गांव के पशुधन एवं गरीब परिवारों के हितों की रक्षा करने की मांग की।