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September 4, 2026, 10:58 am
KHABAR : बरड़िया जागीर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान धर्म, कर्म और भक्ति का संदेश, भागवताचार्य पंडित रुद्रदेव त्रिपाठी ने कहा- श्रीमद्भागवत वेद-उपनिषदों का सार है, पढ़े खबर 

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नीमच। श्रीमद्भागवत ज्ञान की वह गंगा है, जो श्लोकों के माध्यम से मनुष्य को सत्य का दर्पण दिखाती है। श्रीमद्भागवत मुक्ति का कल्पवृक्ष और भगवान श्रीकृष्ण का वाङ्मय स्वरूप है। यह वेद एवं उपनिषदों का सार है। यह बात भागवताचार्य पंडित रुद्रदेव त्रिपाठी ने ग्राम भादवामाता के समीप बरड़िया जागीर स्थित श्री द्वारकापुरी धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि भावना से ऊपर कर्तव्य होता है और माता-पिता की सेवा मनुष्य का प्रथम कर्तव्य है। मनुष्य को सदैव पुण्य कर्म करते रहना चाहिए तथा पाप कर्मों से बचना चाहिए। कर्मों का फल व्यक्ति को भोगना पड़ता है और पुण्य कर्म मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

भगवान के लिए भाव ही प्रधान-
पंडित त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण और विदुरानी के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान स्वाद नहीं, भक्त के भाव देखते हैं। विदुरानी ने प्रेम और श्रद्धा से भगवान श्रीकृष्ण का सत्कार किया, इसलिए भगवान ने दुर्याेधन के छप्पन भोग को छोड़कर उनके प्रेम से अर्पित केले के छिलके भी स्वीकार किए। उन्होंने कहा कि भगवान प्रेम भाव के भूखे हैं, धन-संपत्ति के नहीं। यदि भगवान धन से प्रसन्न होते तो उनका निवास रिजर्व बैंक में होता। भगवान को सच्चे प्रेम और श्रद्धा से भजने पर जीवन का कल्याण संभव है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण माता यशोदा के प्रेम के बंधन में बंधे, क्योंकि प्रेम में वह शक्ति है जो भगवान को भी बांध सकती है। वेद-शास्त्र और उपनिषदों के अनुसार मनुष्य को अपनी कमाई का कुछ अंश धर्म एवं सेवा कार्यों में लगाना चाहिए।

महाभारत के प्रसंगों से दिया धर्म का संदेश-
भागवताचार्य ने महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण पांडवों के दूत बनकर दुर्याेधन के पास गए और युद्ध टालने के लिए केवल पांच गांव देने की बात कही थी, लेकिन दुर्याेधन ने इसके लिए भी इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पांडव धर्म के साथ खड़े थे और अंततः सत्य की विजय हुई।

उन्होंने द्रौपदी, अश्वत्थामा एवं उत्तरा के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि द्रौपदी ने अपने पुत्रों की हत्या करने वाले अश्वत्थामा को गुरु पुत्र होने के कारण क्षमा कर दिया था। अश्वत्थामा द्वारा उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे पर ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने पर भगवान श्रीकृष्ण ने उसकी रक्षा की।

उन्होंने कहा कि सुख-दुःख दोनों परिस्थितियों में मनुष्य को भगवान का स्मरण करना चाहिए। कुंती ने भी भगवान श्रीकृष्ण से जीवन में दुःख मांगा था, क्योंकि दुःख के समय भगवान का स्मरण और सान्निध्य अधिक गहरा होता है। भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु का वरदान होने के बावजूद बाणों की शय्या पर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतीक्षा की।

सनातन धर्म और सेवा का महत्व-
पंडित त्रिपाठी ने कहा कि दया धर्म का मूल है, लेकिन आधुनिक युग में दया की भावना कम होना चिंतन का विषय है। दान के बिना धर्म की पूर्णता नहीं होती। धर्म कभी नहीं बदलता, बल्कि मनुष्य के कर्म बदलते हैं। जो सदैव बना रहे, वही सनातन है। सनातन धर्म को कोई नष्ट नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि शरण में आने वाले की रक्षा करना राजधर्म है और कलियुग में गलत मार्ग पर जाने वाले व्यक्ति को सही रास्ता दिखाना भी पुण्य कर्म है। व्यक्ति को परिश्रम और पुरुषार्थ करते हुए आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

भागवताचार्य ने राजसूय यज्ञ, धर्मराज युधिष्ठिर, अर्जुन संवाद तथा व्यास, मत्स्य, वामन, ध्रुव, नृसिंह, मोहिनी, बलराम, राम, परशुराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध एवं कल्कि सहित 24 अवतारों के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्व पर प्रकाश डाला।

8 सितंबर को पूर्णाहुति एवं महाप्रसादी-
बरड़िया जागीर स्थित श्री द्वारकापुरी परिसर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा का आयोजन प्रतिदिन सुबह 11.15 से दोपहर 3.15 बजे तक किया जा रहा है। कथा व्यास पंडित रुद्रदेव त्रिपाठी के मुखारविंद से कथा का वाचन हो रहा है। कथा का सीधा प्रसारण पंडित रुद्रदेव त्रिपाठी के यूट्यूब चौनल पर भी किया जा रहा है।

आयोजन में आगामी कार्यक्रम के तहत 4 सितंबर को ध्रुव चरित्र, 5 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 6 सितंबर को बाल लीला एवं गोवर्धन लीला, 7 सितंबर को महारास एवं उद्धव-गोपी संवाद तथा 8 सितंबर को सुदामा चरित्र, पूर्णाहुति एवं आरती का आयोजन होगा। पूर्णाहुति एवं आरती के बाद 8 सितंबर को शाम 4 बजे महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।

आयोजन के धर्मलाभार्थी कारूलाल-संपतबाई, ग्राम पंचायत बरड़िया जागीर के सरपंच एवं सरपंच संघ मनासा के ब्लॉक अध्यक्ष रघुवीर शर्मा एवं सीमा शर्मा तथा देवीलाल-लक्ष्मी शर्मा, जोबरिया परिवार बरड़िया जागीर हैं।

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