चित्तौड़गढ़। प्रताप नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व हर्षोल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने गीत, नृत्य एवं विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके दिव्य गुणों को याद किया। इस अवसर पर चैतन्य राधा-कृष्ण की मनोहारी झांकी भी सजाई गई।
सेवा केंद्र संचालिका राजयोगिनी आशा दीदी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जन्माष्टमी केवल घर-आंगन को सजाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने मन को सुंदर और पवित्र बनाने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि इस पर्व पर व्यक्ति को अपने भीतर क्रोध के स्थान पर शांति, अहंकार के स्थान पर विनम्रता, शिकायत के स्थान पर क्षमा और नफरत के स्थान पर प्रेम का भाव विकसित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान को केवल बाहरी सजावट नहीं, बल्कि सुंदर और पवित्र मन प्रिय है। श्रीकृष्ण को अपने घर में विराजमान करने से पहले प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि क्या उसका मन भी उनके रहने योग्य है। उन्होंने श्रद्धालुओं से श्रीकृष्ण की मूर्ति के साथ उनके दिव्य गुणों को भी अपने जीवन में धारण करने का आह्वान किया।
आशा दीदी ने कहा कि किसी को क्षमा करना, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना या किसी दुखी व्यक्ति को सहारा देना भी परमात्मा की सेवा के समान है। श्रीकृष्ण का जन्म केवल उत्सव नहीं, बल्कि नई और पवित्र दुनिया के आगमन का संदेश है। जीवन में प्रेम, पवित्रता, मधुरता और सद्भाव को अपनाने से ही सच्चे आनंद और शांति का अनुभव किया जा सकता है।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक गीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों को जीवन में धारण करने तथा अपने व्यवहार और कर्मों के माध्यम से प्रेम, शांति, पवित्रता एवं सद्भाव का संदेश देने का संकल्प लिया।