मनासा। आसमान से बरसता पानी... सामने चिता... और उसे बारिश से बचाने के लिए अपने हाथों से तिरपाल थामे खड़े ग्रामीण। मनासा क्षेत्र की ग्राम पंचायत खजुरी में राधाकिशन पाटीदार के अंतिम संस्कार का यह दृश्य व्यवस्था के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी गांव और समाज के बीच बिताई, उसकी अंतिम विदाई के समय भी ग्रामीणों को सुरक्षित छत तक नसीब नहीं हुई। लगातार बारिश के बीच ग्रामीण तिरपाल संभालते रहे और उसी के नीचे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। यह तस्वीर अब पूरे मामले को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
श्मशान घाट की बदहाली या जिम्मेदारों की अनदेखी?
ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान घाट की बदहाल स्थिति को लेकर पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार शिकायत एवं आवेदन दिए गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। बारिश के मौसम में यहां अंतिम संस्कार करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों ने पंचायत के पूर्व सचिव पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत में लंबे समय तक पदस्थ रहे पूर्व सचिव पर कथित रूप से फर्जी बिलों के जरिए लाखों रुपए की राशि निकालने और ट्रांसफर करने के आरोप हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच के बाद ही वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विकास के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल-
गांव में विकास और सुविधाओं के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी यदि ग्रामीणों को बारिश में तिरपाल थामकर खड़ा होना पड़े, तो सवाल उठना लाजिमी है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से श्मशान घाट की स्थिति सुधारने की मांग की जा रही है। इसके बावजूद स्थायी शेड, पर्याप्त व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
अब प्रशासन के सामने चुनौती-
राधाकिशन पाटीदार के अंतिम संस्कार की तस्वीर ने वर्षों से चली आ रही समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले की गंभीरता से जांच करेगा? क्या श्मशान घाट की बदहाली दूर करने के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? और क्या ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर सुविधाएं मिलेंगी?
बारिश में तिरपाल के नीचे हुआ यह अंतिम संस्कार सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि गांव की व्यवस्था पर उठता बड़ा सवाल बन गया है। अब नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है।