उज्जैन। शहर के बीच सिंधिया ट्रस्ट के द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के चार दिन बाद बछ बारस पर मंगलवार को मटकी फोड़ आयोजन किया गया। मंदिर के मुख्य द्वार पर करीब 10 फीट ऊंचाई पर माखन की मटकी बांधी गई थी।
कृष्ण के रूप में सजे एक छोटे बालक को मंदिर से बाहर लाया गया। दोपहर करीब 12 बजे इस बाल कृष्ण ने लाठी से मटकी फोड़ी। इसके बाद माखन, मिश्री और धानी का प्रसाद श्रद्धालुओं को बांटा गया।
मटकी फूटते ही मंदिर परिसर ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद लिया। इसके बाद भगवान द्वारकाधीश की चांदी की पादुकाओं की पूजा की गई। दोपहर करीब एक बजे दिन में शयन आरती भी की गई।
मंदिर से जुड़े श्रद्धालु संजय मालिया ने बताया कि यह पुरानी परंपरा है। जन्माष्टमी के बाद चार दिन तक भगवान की रात में शयन आरती नहीं की जाती। माना जाता है कि इस दौरान भगवान के सोने और जागने का समय तय नहीं होता।
बछ बारस के दिन मटकी फोड़ने के बाद भगवान के शयन की परंपरा है। इसलिए साल में एक बार दिन में शयन आरती होती है। मालिया ने यह भी बताया कि इस आयोजन में बच्चों को राधा-कृष्ण के रूप में सजाया जाता है। मंदिर के व्यवस्थापक और पुजारी परिवार मुख्य द्वार पर पहुंचकर यह आयोजन करते हैं।