नीमच। आगामी अफीम नीति को लेकर अफीम किसानों में उत्सुकता बढ़ गई है। टाउन हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किसानों ने आगामी नीति को लेकर अपनी विभिन्न मांगें और समस्याएं सामने रखीं। किसानों ने सीपीएस पद्धति समाप्त करने, मार्फिन के आधार में राहत देने, पुराने अफीम पट्टे बहाल करने तथा अफीम की फसल को फसल बीमा योजना में शामिल करने की मांग उठाई।
किसानों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में उन्हें उत्पादन और मार्फिन के मापदंडों को लेकर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आगामी नीति में किसानों के हित में व्यावहारिक बदलाव किए जाने की मांग की।
सीपीएस पद्धति समाप्त करने की मांग-
किसानों ने कहा कि सीपीएस पद्धति को समाप्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इस व्यवस्था में हर वर्ष कितना उत्पादन देना होगा, इसे लेकर किसानों में असमंजस बना रहता है। किसानों ने मांग की कि सभी किसानों के लिए ऐसी व्यवस्था हो, जिसमें उत्पादन संबंधी मापदंड स्पष्ट और व्यावहारिक हों।
3.5 मार्फिन के आधार पर पट्टे देने की मांग-
किसानों ने आगामी अफीम नीति में 3.5 के मार्फिन आधार पर पट्टे जारी करने की मांग रखी। किसानों का कहना है कि मार्फिन के आधार को लेकर राहत मिलने से अधिक किसानों को अफीम खेती का अवसर मिल सकेगा।
कुछ किसानों ने यह भी मांग की कि जिन किसानों के पुराने पट्टे मार्फिन के आधार पर निरस्त हुए हैं, उनके मामलों की पुनः समीक्षा कर पात्र किसानों के पट्टे बहाल किए जाएं।
अफीम के उचित मूल्य की मांग-
किसानों ने अफीम के वर्तमान मूल्य को लेकर भी असंतोष जताया। उनका कहना है कि किसानों को मिलने वाला मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में बताए जाने वाले मूल्य की तुलना में काफी कम है। उन्होंने अफीम का उचित एवं लाभकारी मूल्य निर्धारित करने की मांग की।
धारा 29 को लेकर भी उठी आवाज
किसानों ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 से जुड़े प्रकरणों को लेकर भी अपनी चिंता जताई। उनका कहना है कि किसी एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होने पर अन्य किसानों के भी परेशान होने की स्थिति बनती है। किसानों ने इस प्रावधान के दुरुपयोग पर रोक लगाने और किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाने की मांग की।
मार्फिन मापदंड को लेकर वैज्ञानिक आधार की मांग-
कार्यक्रम में किसानों ने कहा कि अफीम की गुणवत्ता और मार्फिन का निर्धारण वैज्ञानिक आधार पर होना चाहिए। किसानों का कहना था कि उन्हें यह भी स्पष्ट किया जाए कि खेती की परिस्थितियों में मार्फिन का स्तर किस प्रकार प्रभावित होता है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में व्यावहारिक मापदंड तय करने की मांग की।
खराब फसल के मामले में भी राहत की मांग-
किसानों ने प्राकृतिक कारणों से खराब या नष्ट हुई अफीम की फसल को लेकर भी राहत की मांग रखी। उनका कहना है कि यदि फसल खराब होने के कारण उसे नष्ट करना पड़े तो किसानों को उचित प्रक्रिया के तहत राहत मिलनी चाहिए।
फसल बीमा में शामिल करने की मांग-
किसानों ने अफीम की फसल को फसल बीमा योजना में शामिल करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि ओलावृष्टि या अन्य प्राकृतिक आपदा से फसल नष्ट होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और वर्तमान में इसकी पर्याप्त भरपाई नहीं हो पाती। फसल बीमा का लाभ मिलने से किसानों को सुरक्षा मिल सकेगी।
किसानों ने आगामी अफीम नीति जल्द जारी करने की मांग करते हुए कहा कि नीति समय पर घोषित होने से किसान आगामी सीजन की खेती की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे।