BREAKING NEWS
BIG NEWS : फरार इनामी की तलाश में जुटी पुलिस को मिली.. <<     10 हजार का इनामी आखिरकार चढ़ा पुलिस के हत्थे! NDPS.. <<     KHABAR : कृषि क्विज के विजेताओं को मिले आकर्षक.. <<     NMH HEADLINES : नीमच शहर की बड़ी खबरें: स्थापना दिवस पर.. <<     BIG NEWS : नीमच के इन इलाकों में सोमवार को रहेगा.. <<     मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर खरगोन में.. <<     मरीज की मौत पर अस्पताल में बवाल! शव रखकर.. <<     ब्रेजा कार मे नशे की खेप लेकर जा रहे थे दो.. <<     KHABAR : लोकतंत्र, मतदान और SIR पर विद्यार्थियों से.. <<     KHABAR : बिस्टान में सेवा भारती और जन अभियान परिषद.. <<     VIDEO NEWS: कमल चौक पर बाइक की टक्कर से दंपती घायल,.. <<     BIG NEWS : सड़क हादसे में पति-पत्नी घायल, जिला.. <<     KHABAR : बुरहानपुर में लोक संस्कृति की धूम, मध्य.. <<     KHABAR : ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’ थीम पर विधिक.. <<     NEWS : पंचायत राज चुनाव के तृतीय चरण की तैयारियां.. <<     HEADLINES : MP में आज बड़ी हलचल: उद्योगों को सौगात,.. <<     KHABAR : नीमच में ‘विकसित भारत युवा संवाद, अपना वोट.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
September 9, 2026, 7:23 pm
NEWS : अग्नि, पानी और हवा अनियंत्रित हों तो विनाश तय, उसी तरह जीवन में मर्यादा जरूरी, साध्वी प्रतिभा श्री ने पर्युषण पर्व पर श्रद्धालुओं को दिया संयमित जीवन का संदेश, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

Share On:-

चित्तौड़गढ़। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के द्वितीय दिवस शांति भवन सैंथी में विराजित महासतियों के प्रवचन अनवरत जारी रहे। इस अवसर पर साध्वी प्रेरणा श्री ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया।

स्पष्ट वक्ता साध्वी प्रेक्षा श्री ने कहा कि आत्मा में बसना पर्युषण है, जबकि दुनिया में बसना प्रदूषण है। सामयिक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सामयिक व्यक्ति को विभाव से स्वभाव की ओर ले जाती है। भटकते मन को स्थिर करने और आत्मकल्याण के लिए सामयिक आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि शरीर और आत्मा का भेद तब समझ में आता है, जब शरीर को कष्ट होता है। सामयिक स्व-आत्मकल्याण का महत्वपूर्ण साधन है। अनेक आत्माओं ने सामयिक की साधना के माध्यम से मोक्ष का मार्ग प्राप्त किया है। साधु की सामयिक को दीक्षा कहा जाता है, अर्थात जीवनभर के लिए सामयिक व्रत को अंगीकार करना।

साध्वी प्रेक्षा श्री ने कहा कि सामयिक में किसी प्रकार का विकार नहीं होना चाहिए। सभी साधनाएं समान हो सकती हैं, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति का साध्य अलग-अलग हो सकता है। यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य से भटक गया तो उसे मंजिल प्राप्त करना कठिन हो जाता है। सामयिक मोक्ष प्राप्ति का साधन है।

उन्होंने बताया कि साधु की सामयिक तीन करण और तीन योग की होती है, जबकि श्रावक की सामयिक दो करण की होती है। श्रावक को पूरी वेशभूषा और उचित भाव के साथ सामयिक करनी चाहिए, तभी सामयिक के वास्तविक भाव उत्पन्न होते हैं। प्रातःकालीन सामयिक को विशेष रूप से शुद्ध माना गया है। शांत वातावरण में सामयिक करने से मन और तन दोनों प्रफुल्लित होते हैं।

उन्होंने कहा कि सामयिक में तप और आराधना का भाव निहित है। यदि क्रोध की आग को बुझाना है, मन की चंचलता को शांत करना है अथवा आत्मा को सुखी बनाना है तो सामयिक अवश्य करनी चाहिए।

मर्यादित जीवन ही मोक्ष मार्ग की ओर ले जाता है

साध्वी प्रतिभा श्री ने ‘जैनम् जयति शासनम्’ के साथ अपने व्याख्यान में कहा कि जीवन में मर्यादा का होना आवश्यक है। मर्यादित जीवन ही व्यक्ति को मोक्ष मार्ग की ओर ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि अग्नि, पानी और हवा तीनों अनियंत्रित हो जाएं तो विध्वंस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उसी प्रकार व्यक्ति के जीवन में भी मर्यादा और संयम आवश्यक हैं।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE