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November 14, 2022, 11:50 am
NEWS : राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा- आध्यात्मिक उन्नति के लिए संयम की आवश्यकता होती है और संयम ही सुख का आधार है, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। जिस प्रकार हाथी को अंकुश से घोड़े को लगाम है ऊंट को नकेल से और वाहन को ब्रेक से नियंत्रित करने की जरूरत पड़ती है। इसी प्रकार इंद्रियों के विषयों को नियंत्रित करने के लिए हमारे जीवन में संयम की बहुत आवश्यकता है। उक्त विचार ब्रम्हाकुमारी सेवा केंद्र प्रताप नगर पर राजयोगिनी आशा दीदी ने व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि इस घोर कलयुग के समय मनुष्य का जीवन विकारों के गहन अंधकार से भरा हुआ है और हमें आंतरिक उत्थान और आत्मिक उन्नति के लिए संयम की अति आवश्यकता है। संयम को अपनाने से ही मनुष्य बड़े लक्ष्य को हांसिल कर सकता है और संयम ही मनुष्य को महान बनाता है। मन की गुलामी जगत की गुलामी है जीवन रूपी रथ में इंद्रियों रूपी घोड़े जूते हुए हैं। यह घोड़े अपने-अपने विषयों में भटका कर जीवन रूपी रथ को कुमार की ओर ले जा रहे हैं। इसलिए मन रूपी लगाम को मजबूत करें जिसका मन वश में है वह सारे विश्व को वश में कर सकता है और जो मन के वश है और सारे विश्व का दास जिस प्रकार भवन निर्माण के लिए सीमेंट ईट पत्थर लोहा लकड़ी जरूरी है। जीवन निर्वाह के लिए भोजन पानी विश्राम की आवश्यकता है। फसल पैदा करने के लिए जमीन खाद पानी बीज दुपारी चाहिए सफलता के लिए कठिन मेहनत हिम्मत और दूसरों का साथ जरूरी है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य को आत्मिक विकास के लिए भी संयम की बहुत आवश्यकता है तभी मनुष्य विकारों रूपी बुराइयों से छुटकारा पाकर अपना जीवन सर्वश्रेष्ठ बना सकता है। 
यह विचार ब्रम्हाकुमारी सेवा केंद्र प्रताप नगर पर राजयोगिनी आशा दीदी ने उच्चारण किए उन्होंने कहा जिस जिसका मन वश में है संयमित है वह सदा संतुष्ट रहता है कहां जाता है अपने हिस्से का खाना प्रकृति है दूसरे के हिस्से का छीन कर खाना विकृति हैं और जो अपने हिस्से को भी बांट कर खाएं वही संस्कृति हैं तो आज की संस्कृति मनुष्य भूला हुआ है आज सामाजिक जीवन में गौर प्रदूषण फैला हुआ है मनुष्य स्वयं की सुख-सुविधा के साधन जुटाने के लिए दूसरों को दुख पहुंचा कर अपने लिए संतोष इकट्ठा कर रहा है, परंतु संतोष इसमें नहीं है। यदि हम सदा संतोष संतुष्ट रहना चाहते हैं तो दुआएं दे और दुआएं ले अर्थात हर मनुष्य आत्मा के प्रति हमारी सकारात्मकता सदा बनी रहे सब के प्रति शुभ भावना और शुभकामना की दृष्टि बनी रहे तभी हम सदा संतुष्ट रह सकते हैं और अन्य को संतुष्ट कर सकते हैं इसी के साथ आशा दीदी ने बताया कि हनवा गांव में मधु दीदी ने सात दिवसीय राजयोग मेडिटेशन सिखाया गया, जिसमें गांव के सभी बुजुर्ग माताएं एकत्रित होकर ईश्वर का सत्य परिचय लेकर अपने जीवन को भरपूर कर रही है ईश्वरी सत्संग का लाभ ले रही है सभी मातृशक्ति इस ईश्वरी सत्संग को रोज सुनकर बहुत खुश हो रही है और परमात्मा शिव से अपना बुद्धि योग जोड़ करके स्वयं को बहुत बहुत भाग्यवान अनुभव कर रही हैं और सभी नित्य गीता ज्ञान का लाभ ले रही है।

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