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July 17, 2023, 7:48 pm
BIG NEWS : कांग्रेस नेता हरीश दुआ ने उठाया सवाल, अवैध कॉलोनियों को वैध कर सकते हैं, तो एमओएस का निराकरण क्यों नहीं, भूमि विकास अधिनियम 2012 की धारा 56 में संशोधन कर जनता को दी जाए राहत, पढ़े खबर 

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नीमच। प्रदेश सरकार नगरीय क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों को वैध घोषित कर सकती है, तो वैध कॉलोनियों की एमओएस समस्या का निराकरण क्यों नहीं करती है। अगर भूमि विकास अधिनियम 2012 की धारा 56 में संशोधन कर दिया जाए, जो नीमच के साथ ही पूरे प्रदेश की जनता को राहत मिल सकती है।
यह सवाल कांग्रेस नेता हरीश दुआ ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उठाया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नीमच में बंगला-बगीचा और अवैध कॉलोनियों की समस्या का निराकरण होने के बाद सबसे बड़ी समस्या है एमओएस के उल्लंघन की। एमओएस के उल्लंघन के कारण भवनों की लीज नवीनीकरण और नामांतरण भारी दिक्कत होती है। नीमच शहर में जितनी भी कॉलोनियों नगरपालिका के अंतर्गत आती है, उनमें अधिकांश भवन ऐसे हैं, जिसमें एमओएस का उल्लंघन है।
दुआ ने बताया कि भूमि विकास अधिनियम 2012 के अंतर्गत नगरपालिका लीज नवीनीकरण और नामांतरण करने के दौरान साईड एमओएस उल्लंघन के प्रकरणों में तो समझौता कर लेती है, लेकिन फ्रंट एमओएस उल्लंघन में समझौता नहीं होता है। दुआ ने बताया कि नीमच शहर में नगरपालिका के रिकार्ड के अनुसार करीब 35 हजार मकान बने हुए हैं, जिसमें लगभग 12 हजार बंगला-बगीचा क्षेत्रों में और शेष शहर के विभिन्न आवासीय क्षेत्र और कॉलोनियों में हैं। इन 35 हजार मकान में से  अधिकांश मकान ऐसे हैं, जिसमें एमओएस का उल्लंघन कर निर्माण किया गया है। कारण यह है कि करीब 70 फीसदी से अधिक मकान 300 से लेकर 1000 वर्गफुट के हैं, जिसमें भवन या भूखंडधारी चाहकर भी एमओएस का पालन नहीं करता है।
लीज नवीनीकरण और नामांतरण के लिए लोग लगाते हैं चक्कर-
शहर में सैंकड़ों भवन ऐसे हैं, जिनकी लीज समाप्त हो चुकी है या उनका विक्रय हो चुका है, लेकिन उनका लीज नवीनीकरण और नामांतरण नहीं हो रहा है, जिसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भूमि विकास अधिनियम में फ्रंट एमओएस का उल्लंघन होने पर समझौते का प्रावधान नहीं है। हालांकि पूर्व में शासन ने एमओएस का उल्लंघन करने के मामलों में समझौते की योजना भी नगरीय प्रशासन विभाग के माध्यम से चलाई, लेकिन उसका बहुत कम लोगों को ही लाभ मिल पाया। हालातों के मद्देनजर नगरपालिका अध्यक्ष और जिलाधीश को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए शासन स्तर से ऐसे प्रयास करने चाहिए कि भूमि विकास अधिनियम 2012 की धारा 56 में संशोधन कर एमओएस की समस्या का निराकरण करना हो जाए, जिससे सैंकड़ों लोगों को राहत मिले और भवन की लीज डीड को बढाने और नामांतरण में नपा को भी दिक्कत न हो।
1000 वर्गफुट तक भूखंड पर न हो निर्माण अनुमति की जरूरत-
कांग्रेस नेता हरीश दुआ ने बताया कि राजस्थान में 1000 वर्गफुट के भूखंड के पर भवन निर्माण अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। राजस्थान की तर्ज पर मप्र में में भी ऐसी व्यवस्था होना चाहिए। इसके लिए क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शासन स्तर पर प्रयास करने चाहिए। दुआ ने कहा कि अगर वर्तमान सरकार इस मुद्दें पर गंभीरता नहीं दिखाती है, तो आने वाले समय में जैसे ही कांग्रेसनीत सरकार का प्रदेश में गठन होता है, वे एमओएस की समस्या का निराकरण करने और राजस्थान की तर्ज पर मप्र में भी 1000 वर्गफुट तक के भवन निर्माण के लिए अनुमति की आवश्यकता को खत्म करने का मुद्दा पूरजोर तरिके से उठाएंगे।

 

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