नीमच। केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की शिवराज सरकार किसान हितों के साथकुठाराघात कर रही है। भाजपा ने खेती को लाभ का धंधा बनाने का वादा किया था, लेकिन मप्र का किसान खेती में नुकसानी से परेशान है। चार साल बाद कम उत्पादन के चलते किसानों को लहसुन का लाभकारी मूल्य मंडियों में मिल रहा है, लेकिन सरकार ने लहसुन का आयात बढ़ा दिया है। इस कारण किसानों कोप्रति क्विंटल 5 से 8 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। वादे झूठे, किसान हित की चिंता नहीं। यह बात कांग्रेस नेत्री एवं पूर्व सभापति कृषि स्थाई समिति जिला पंचायत नीमच मधु बंसल ने कही है।
बंसल ने बताया कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव के समय किसानों को फसल का लाभकारी मूल्यदिलाने का वादा घोषणा पत्र में किया था। इसी तरह से विधानसभा चुनाव के समय भी भाजपा ने खेती को लाभ का धंधा बनाने का वादा किया था। कड़ी मेहनत से किसान बेहतर उत्पादन कर रहे हैं, जिसकी बदौलत शिवराज सरकार कृषि कर्मण्य पुरस्कार हासिल करती है, लेकिन दुर्भाग्यजनक तथ्य यह है कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की शिवराज सरकार को किसान हित की चिंता कतई नहीं है।
इन देशों से आयात हो रही लहसुन-
बंसल ने बताया कि बीते तीन वर्षों से लहसुन के भाव 200 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल रहे हैं। कई बार ऐसे हालात भी देखने को मिले कि किसान को गांव से मंडी में लहसुन लाने का किराया-भाड़ा भी नहीं मिल सका। इस कारण किसानों को मंडियों में लहसुन को आग के हवाले करना पड़ा या पानी में बहना पड़ा। चार साल बाद अब देशी व सेकंड ऊंटी लहसुन के भाव 5000 से 25000 रुपये क्विंटल तक पहुंचे हैं, जिससे किसान को लाभकारी मूल्य मिलने लगा है। उस पर भी केंद्र की मोदी सरकार ने अफगानिस्तान, ईरान और चाइना से लहसुन का आयात शुरू कर दिया है। जिस कारण लहसुन के भाव 5 से 8 रुपए तक कम हो गए हैं, जबकि वर्तमान में लहसुन उत्पादन का सीजन नहीं है।
नहीं मिल रहा फसल बीमा का लाभ-
बंसल ने कहा कि केंद्र सरकार की कु-नीतियों के कारण पिछले नौ वर्षों में रासायनिक खाद, दवाइयों के भाव दो गुना अधिक बढ़ गए हैं, जिससे खेती की लागत दो गुना बढ़ गई है, जबकि कृषि जिंसों का लाभकारी मूल्य किसानों को नहीं मिल पा रहा है। यही नहीं फसल नुकसानी के बावजूद किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसान मायूस एवं परेशान हैं।
वर्षा की खेंच, मुरझा रही फसलें-
बंसल ने बताया कि वर्तमान में नीमच जिले में करीब एक माह से वर्षा की खेंच के चलते फसलें मुरझा रही है। सोयाबीन और अन्य फसलों की ग्रोथ रूक गई है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में फसलों को 25 प्रतिशत से अधिक नुकसान हो चुका है। सरकार के पास फसल नुकसानी के आकलन की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। भाजपा सरकार के नेता केवल घोषणाएं कर रहे हैं और झूठे वादों से बरगलाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि निराश किसान पूरी तरह से बाजार के हवाले और भगवान के भरोसे हो गया है।
तो करेंगे आंदोलन-
बंसल ने कहा कि यदि भाजपा सरकार ने लहसुन का आयात नहीं रोका तो फिर से लहसुन के भाव न्यूनतम स्तर पर आ जाएंगे। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए किसान हित में कांग्रेस किसानों को साथ लेकर आंदोलन का रुख अपनाएगी। जरूरत पड़ी तो धरना प्रदर्शन और चक्का जाम भी किया जाएगा।