नीमच। भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक निमित्त वीर वंदना का आयोजन आचार्य श्री प्रसन्न चंद्र सागर जी महाराज की निश्रा में हुआ इसमें सूर्याेदय से पूर्व सुबह6 बजे पुस्तक बाजार स्थित श्री भीडभांजन पार्श्वनाथ मंदिर मेंश्री संघ पदाधिकारियों समाज जनों की उपस्थिति में महावीर स्वामी के निवार्ण का लड्डू चढ़ाया गया। मिडिल स्कूल मैदान के समीप जैन आराधना भवन में हजारों दिपों की झिलमिलाहट के मध्य हजारों श्रावक- श्राविकाएं शामिल हुए। आयोजन के मध्य आचार्य श्री की निश्रा में प्रभु महावीर के अंतिम समवसरण की साक्षात रचना की गई। सुबह में गीत संगीत के साथ प्रभु निवार्ण कल्याणक मनाया गया। श्रावक सफेद वस्त्र और सभी श्राविकाएं केसरिया वस्त्रों में नजर आई। प्रभु वंदना के साथ सभी ने 108 दीपक घी से दीप जलाकर महाआरती की।
इस अवसर पर सभी ने अपने घर से साथ लाए दीपक से भी आरती की। आचार्य श्री ने इस अवसर पर कहा किभगवान महावीर बनने के लिए पहले तो महावीर दिल में चाहिए ,दो महावीर के मिलने के बाद ही उनकी पहचान होना चाहिए, तीन महावीर हमें पसंद आने चाहिए ,चार महावीर के मार्ग पर चलना आना चाहिए ,पांच मुझे महावीर बनना चाहिए, यदि यह हो गया तो समझना हम महावीर बनने की राह पर हैं। इनके लिए जबरदस्त पुण्य होना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि आजकल बच्चे कार्टून और फिल्मी कलाकार को पसंद करते हैं और उनके दोस्त बनते हैं हमें बच्चों को प्रभु का दोस्त बनाना है। कार्यक्रम के बाद नवकारसी हुई।
आचार्य श्री के मुखारविंद से नवस्मरण एवं गौतम स्वामी का रास, महामांगलीक के रूप में श्रवण कराया गया। घर पर बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित थे। धार्मिक कार्यक्रम श्री जैन श्वेतांबर भीड़भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट श्री संघ नीमच के तत्वाधान में आयोजित किया। श्री संघ अध्यक्ष अनिल नागौरी ने बताया कि धर्मसभा में तपस्वी मुनिराज श्री पावनचंद्र सागरजी मसा एवं पूज्य साध्वीजी श्री चंद्रकला श्रीजी मसा की शिष्या श्री भद्रपूर्णा श्रीजी मसा आदि ठाणा 4 का भी चातुर्मासिक सानिध्य मिला। समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लिया। उपवास, एकासना, बियासना, आयम्बिल, तेला, आदि तपस्या के ठाठ लग रहे है। धर्मसभा में जावद ,जीरन, मनासा, नयागांव, जमुनिया,जावी, आदि क्षेत्रों से श्रद्धालु भक्त सहभागी बने। धर्मसभा का संचालन सचिव मनीष कोठारी ने किया।