निंबाहेड़ा। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने हिंसा के तांडव के बीच गौशालाये खोलकर अहिंसा का शंखनाद किया। यह कथन मुनि भाव सागर ने यहां आयोजित धर्म सभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने आगे कहा कि हथकरघा के माध्यम से कैदियों को बुरी आदतों से दूर करके आजीविका का साधन प्रदान किया। आचार्य श्री ने 51 हजार किलोमीटर की पद यात्रा की है ।
मंत्र बहुत पावरफुल होते हैं, इनको मोबाइल की रिंगटोन में नहीं डालें, मंत्र की माला फेरने से बहुत फायदा होता है, संकल्प करके माला फेरते हैं तो बहुत फायदा होता है, मंत्र संकट में सहायता करता है। जो मन को पाप से बचाता है उसे मंत्र कहते है भगवान के निकट जाप करने से अनंत गुना लाभ प्राप्त होता है। माला फेरने से व्यक्ति मालामाल हो जाता है मंत्र की शक्ति से समस्त परेशानी दूर होती है। इक्षित कार्य की सिद्धि होती है। णमोकार मंत्र 2000 वर्ष प्राचीन है मन की बिखरी शक्ति मन्त्र के ध्यान से एकत्र होती है। मन्त्र और औषधि में अचिन्त्य प्रभाव होता है, मन्त्र में भी विद्युत की तरह शक्ति है, शब्द की भी शक्ति होती है, बुरी शक्ति अनिष्ट नहीं कर सकती हैं।
शांति भक्ति में आचार्य पूज्यपाद स्वामी जी ने लिखा है कि विद्या, औषधि, मंत्र, जल, हवन आदि अपना अपना कार्य करते हैं। मंदिर के लिए प्रभु के लिए जो भी अर्पण किया जाता है। वह भी पूजा के अंतर्गत आता है। भक्ति में तन्मयता के लिए हम प्रभु को सर्वश्रेष्ठ सामग्री अर्पण करते हैं। मंदिर सुख, शांति, समृद्धि, प्रदान करने वाले होते हैं। भगवान को छत्र, चमर, भामंडल, प्रतिमा विराजमान करवाना वेदी का निर्माण, शिखर का निर्माण, मंदिर के लिए भूमि आदि का दान भी पूजन के अंतर्गत आता है।इसलिए मंदिर के लिए हमेशा सर्वश्रेष्ठ सामग्री का दान करते रहना चाहिए। जिससे जीवन में पाप कम होता है और पुण्य की वृद्धि होती है। हमेशा इष्ट पदार्थों की प्राप्ति होती रहती है। आगामी भवो में भी इसका फल मिलता है।
इस अवसर पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मे आचार्य विद्यासागर जी महामुनिराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि विमलसागर जी, अनंतसागर जी, धर्मसागर जी एवं भावसागर जी के सानिध्य में धर्म सभा का आयोजन हुआ जिसके अंतर्गत चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, शास्त्र अर्पण किया गया।