चित्तौड़गढ़। सनातन वैदिक धर्म में मौनी अमावस्या एक महत्वपूर्ण पर्व है, परन्तु माघ महीने की अमावस्या सर्वाधिक विशेष होती है, क्योंकि इस तिथि को मौन रहने और आत्मा की साधना के लिए जाना जाता है।
श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि इस साल मौनी अमावस्या 9 फरवरी 2024 को है। इस दिन स्नान-दान और धार्मिक कार्यों का महत्व कई अधिक है। स्कंद पुराण में वर्णित है कि ऐसा करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन विशेष रूप से व्रती लोग मौन व्रत रखते हैं और एकांत में बैठकर मौन रहते हैं। इससे वे अपने मन को शांति और ध्यान की अवस्था में ले जाने का प्रयास करते हैं। व्रती लोग भगवान शिव और पर्वती माता की पूजा करते हैं। शिवलिंग की पूजा, बिल्व पत्र का अर्चना और भगवती पार्वती का स्मरण करना उचित है।
इस दिन व्रती व्यक्ति अपने मन को शुद्ध करने और आत्मा को अपने साथ संवाद करने के लिए ध्यान और मनन करते हैं। मौनी अमावस्या पर दान करना भी अच्छा होता है। ब्राह्मणों, गुरुजनों, यतियों और गरीबों को दान देना शुभ माना जाता है। कुछ लोग इस दिन तीर्थ स्थलों की यात्रा करते हैं और पवित्र नदियों में स्नान करने का प्रयास करते हैं। मौनी अमावस्या के दिन व्रती लोगों को बहुत बोलना नहीं चाहिए। वे मौन रहकर अपने मन को शांति प्रदान करने का प्रयास करते हैं। व्रती लोगों को अनादरपूर्वक बातचीत नहीं करनी चाहिए और धार्मिकता में रहना उचित है। मौनी अमावस्या को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दिन किसी भी प्रकार की अशुभ क्रियाएं नहीं करनी चाहिए।