चित्तौड़गढ़। सेंती स्थित शांति भवन में चार्तुमासिक प्रवचन के दोरान बुधवार को श्रमण संघीय उप प्रवर्तनी महासती विजय प्रभा जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक परिपेक्ष के लोगों की आय सीमित है ,किंतु खर्च अधिक है अतः व्यक्ति स्वयं अपने आप मैं दुखी है, आय व खर्च में सन्तुलन की आवश्यकता है।
वही हाल पाप पुण्य का है हमारा पुण्य का पलड़ा पाप से हल्का है, जबकि पुण्य का पलड़ा भारी होना चाहिए, तभी मानव जीवन सार्थक है। आज हम लोगों में राग- द्वेष के कारण शिकायत की प्रकृति बढ़ती जा रही है, किंतु किसी ने हमारे साथ अच्छा किया उसे धन्यवाद की प्रकृति में कमी आती जा रही है। अत आय व खर्च में सन्तुलन बनाए रखें । पूण्य की ओर ज्यादा ध्यान दें व शिकायत के बजाय धन्यवाद शब्द पर बल दे। धर्म सभा का संचालन संघ संरक्षक अभय सिंह संचेती ने किया।