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August 22, 2024, 10:56 am
NEWS : गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में धर्मसभा, श्रावक-श्राविकाओं से रूबरू होते हुए शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती शीलप्रभा ने कहा- पहला सुख निरोगी काया, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में सुज्ञ श्रावक श्राविकाओं से रूबरू होते हुए शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती शीलप्रभा ने कहा कि संसार में हर कोई यही चाहता है कि उसका शरीर निरोगी रहे और उसे बीमारियों का कभी सामना न करना पड़े परन्तु ऐसा होता नहीं है क्यों कि सुखी होना और दुःखी बनना वेदनीय कर्म के अधीन है। वेदनीय कर्म दो प्रकार के होते हैं, एक साता वेदनीय और दूसरा असाता वेदनीय । यदि हमने पूर्व एवम् वर्तमान के जीवन में दूसरों को सुख देकर साता पहुंचाने का शुभ कार्य किया है तो हमारे  सातावेदनीय कर्म का बंध होता है जिस कारण हमें सुख साता का अनुभव होता है और हम स्वयं को पूर्ण स्वस्थ एवम् निरोगी महसूस करते हैं वहीं दूसरी तरफ यदि पूर्व में या वर्तमान में हमने दूसरों को दुःख देकर असाता पहुंचाने का अशुभ कार्य किया है तो हमारे असातावेदनीय कर्म का बंध होता है जो हमें हर तरह से दुःखी बना देता है और हम रोगग्रस्त हो जाते हैं। प्रभु महावीर ने कहा कि ष्सुख दिया सुख होत है, दुःख दिया दुःख होतष् अतः यदि हम स्वयं को सुखी और निरोगी रखना चाहते हैं तो संसार के किसी भी जीव को दुःख देने की कोशिश ना करें बल्कि उन्हें सुखी बनाने की दिशा में नेक कार्य करते रहें। इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने बताया कि  तीर्थंकर भगवान ने विनय को धर्म का मूल बताया है। जिसके जीवन में विनम्रता का गुण होता है वो सबका प्रिय तो बनता ही है,अष्ट कर्माे की निर्जरा में भी निरन्तर आगे रह कर आत्म कल्याण के मार्ग को प्रशस्त करने वाला बनता है। साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा के सानिध्य में दशवेकालिक सूत्र के अध्ययन 6 से 10 की परीक्षा का आयोजन किया गया जिसके परिणाम घोषित किए गए जिसमें कामिनी सुराणा प्रथम, लक्ष्मी पोखरना द्वितीय एवम् सीमा सिसोदिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। संचालन मंत्री इंद्रेश कोठारी ने किया।

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