सरवानियां महाराज। शहर में लोक देवता देवनारायण भगवान की कथा का आयोजन होगा। कथा में भगवान देवनारायण के बगड़ावत परिवार पर भी प्रकाश डाला जायेगा। कथा का दिनांक 11 जनवरी शनिवार से श्री गणेश होगा जिसका समापन दिनांक 21 जनवरी मंगलवार को होगा। कथा का वाचन प्रतिदिन प्रातः 11.00 बजे से सांय 4.00 बजे तक कथा प्रवक्ता सत्यनारायण धनगर द्वारा किया जायेगा तथा श्री शिव शक्ति म्युजिकल ग्रुप हनुमंतिया के साथ गायक कलाकार अशोक राजपूत द्वारा सुरों की प्रस्तुति दी जाएगी। आयोजन समिति से जुड़े पंकज धनगर श्री राम पेयजल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी जनवरी माह में उपरेड़ा रोड़ स्थित श्री जोडेश्वर श्याम मंदिर प्रांगण में लोक देवता देवनारायण की कथा का आयोजन श्री जोडेश्वर श्याम मंदिर विकास समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है जिसमें लोक देवता भगवान देवनारायण जी के जन्म से लेकर समाधी तक के प्रसंगों को श्रवण करने का अवसर धर्म प्रेमी जनों को मिलेगा।
लोक देवता देवनारायण जी का जन्म मालेसरी गांव राजस्थान में हुआ था। लोक देवता देवनारायण जी जन्म के बाद ननीहाल मध्यप्रदेश के देवास में पले बढ़े। तथा घुड़सवारी तथा तलवार बाजी की शिक्षा ग्रहण की। लोक देवता देवनारायण जी को भगवान श्री हरि विष्णु का अवतार माना जाता है।
ढलती शाम के चलते यंहा रुके भगवान देवनारायण तो इतिहास बन गया बछवाड़िया
जब बड़े हुए और देवास मध्यप्रदेश से अपने गांव मालेसरी जाने लगे तो रास्ते में नीमच जिले की जावद तहसील का अरावली पर्वतमाला के समीप सूरज ढल गया । ढलते सूरज के कारण भगवान देवनारायण जी को सुकदेव मुनि की तपोस्थली सुखानंद धाम के समिप अरावली पर्वतमाला की गोद में सुरम्य वातावरण गौरया की चहचहाहट प्राकृतिक रूप से प्रकट मां गंगा की कृपा वाले स्थान बछवाड़िया महादेव में गो वंश और उनके बच्चों सहित रुकना पड़ा इसलिए बावल गांव के समीप स्थित इस पवित्र स्थान को बछवाड़िया कहा जाने लगा। प्रसंगवस जिक्र है कि यंहा आज भी लोक देवता देवनारायण जी के लाव लश्कर और अपने संगी साथी सहित मवेशियों और बछड़ों के रुकने के निशान मौजूद हैं। समय की करवट के साथ यंहा अब विकास की गंगा बह रही है सामाजिक और धार्मिक लोगों ने इस स्थान को प्रर्यटक स्थान के रूप में विकसित कर दिया है यंहा जमीन से करीब ढाई सो सीढियां चढ़ कर भगवान देवनारायण जी के मंदिर तक पहुंचा जाता है जंहा भगवान देवनारायण जी के इतिहास का संबंध नजर आता है। इस स्थान पर महादेव की आराधना और प्राकृतिक झरने को देखने लोगों का आना जाना लगा रहता है। यंहा पहुंचने के लिए गांव बावल होकर जा ना पड़ता है।
बड़ी संख्या में हैं भगवान देवनारायण जी के भक्त-
समिति अध्यक्ष राजुलाल भट्ट, पण्डाजी चंपालाल धनगर, पार्षद विक्रम धनगर, भंवरलाल पाल , शंभुलाल माली , डमरलाल धनगर, विरेन्द्र गुर्जर, जगदीश पाटीदार, लक्ष्मणसिंह राणावत , नाथुलाल धनगर , अनिल राठौर , नंदकिशोर पाटीदार, विष्णु राठौर सहित अन्य ने बताया जिले के साथ साथ जावद तथा सरवानिया महाराज क्षेत्र में लोक देवता देवनारायण जी के भक्तों की बड़ी संख्या में मौजुदगी है इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने इस बार भगवान देवनारायण जी के जीवन प्रसंगों तथा सामाजिक श्रेत्र तथा गो वंश पशुओं तथा मवेशियों के लिए उनके दिल में दया भाव से जुड़ी इस कथा का आयोजन यंहा किया जा रहा है। जिस स्थान पर भगवान देवनारायण जी की कथा होगी वो स्थान सरवानिया महाराज नगर की बड़ी रुंण्डी पर स्थित होकर अपने आप में इतिहास लिए हुवे है। जोडेश्वर श्याम मवेशियों और गो वंश की रक्षा करने वाले देवता हैं जिनको जोड़ो के देवता भी माना जाता है। गांव की बसाहट और इतिहास के साथ साथ जब जब धर्म की हानी और मवेशियों में महामारी फैलती है तब इस स्थान से लोगों को तथा मवेशियों को राहत और न्याय मिला है। समिति के अथक प्रयासों से आज यहां बड़ा मंदिर है सराय है सुविधा पानी सबकुछ उपलब्ध है। जन जन की आस्था का केंद्र जोडेश्वर श्याम का यह मंदिर केवल सरवानिया महाराज के लोगों के लिए नहीं वरन आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी मान और मर्यादा के साथ आस्था का केंद्र है और लोग यहां श्रृद्धा से शिश झुकाते हैं।
कथा का ध्वज फहराया-
बिते दिवस भगवान देवनारायण जी की कथा को लेकर कथा स्थल पर धर्म ध्वजा का ध्वजारोहण किया गया। यह ध्वजा आमलीभाट रोड़ खरे वाले हनुमानजी मंदिर से लेकर कथा स्थल पर फहराई गई।