चीताखेड़ा। समीपस्थ ठिकाना कराड़िया महाराज ग्राम में मुख्य यजमान भगवान सिंह राणावत परिवार के तत्वावधान में खाखरदेव मंदिर परिसर में आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव में चौथे दिन गुरुवार को योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया।कथा पंडाल में प्रवचन के दौरान जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग आया पूरा पंडाल हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रध्दालुओं ने बाल स्वरूप श्री कृष्ण के विग्रह मुखोंटे के दर्शन किए और पूरे मनोभाव से श्री कृष्ण जन्मोत्सव में अपनी पूरी भक्ति भावना उड़ेल दिया। व्यासपीठ पर विराजित श्रीमद् भागवत कथा मर्मज्ञ पं. निरंजन शर्मा ने बाल स्वरुप नन्हें कान्हा को बार-बार दुलारा।
कथा में पं. निरंजन शर्मा ने दान करने के महत्व को समझते हुए कहा कि दान लेना स्वार्थ है देना परमार्थ है, देना देवत्व है लेना असुरत्व है। लेना दुःख की वृद्धि है और देना सुख का विस्तार है। संग्रह की प्रवृत्ति का त्याग और ईश्वर से संबंध जोड़ना ही जीवन का संरक्षण तथा सुख-शांति का प्रमुख आधार है। राजा परीक्षित ने वामन देव को अपने सुख के लालच में 3 पग भूमि दान की तो दुःख ही भोगना पड़ा। अच्छी चीज को लेकर कभी भी अपमान और अभिमान मत करना क्योंकि कभी-कभी अच्छी चीज पर अभिमान करने से बुरे दिनों की शुरुआत हो जाती है।आकाशवाणी से अपनी भावी मृत्यु का संकेत पाकर उसने अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया।वहां एक- एक कर उनके 6 पुत्रों की हत्या कर दी।सातवें गर्भ में खुद शेषनाग के आने पर योग माया ने उनके देवकी के गर्भ से निकाल कर वासुदेव की पहली पत्नी रोहणी के गर्भ में स्थापित कर दिया।भगवान ने 8 वी संतान के रूप में जन्म लिया। कथा पंडाल में प्रसंग पर गांव के ही श्रद्धालु द्वारा बालकृष्ण को कंस के कारागार से नंद बाबा के घर ले जाने की झांकी भी प्रस्तुत की गई।कथा मे पं. निरंजन शर्मा ने रसास्वादन करवाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी को रात्री 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ।भगवान कृष्ण ने संसार को अंधेरे से प्रकाश में लाने के लिए जन्म लिया और अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रुपी प्रकाश से दूर किया।
पं. शर्मा ने कहा कि जब -जब धर्म की हानि इस एकता के भंग होने पर हुई है,भगवान ने अवतार लेकर इसे पुनः स्थापित किया हैं। कथा में श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग पर कथा पंडाल में उपस्थित श्रध्दालु भाव विहल हो गए। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर वासुदेव के रूप में (रामरतन खिंची ) एवं श्री कृष्ण के रूप में ( ठाकुर अभिराज सिंह राणावत ) ने सुन्दर पात्र के रूप में कृष्ण जन्मोत्सव को साकार कर दिया।इस दौरान ..... अवध में आनंद भयो जय राजाराम की.......,........खुल गए सारे ताले करामात हो गई............,गोविंद गोकुल आयो.........,नंद के घर आनंद भयो.........., बाजे- बाजेरे शहनाई बधाई हो मैया तोरे अंगना.......३..आदि कृष्ण भजनों से पंडाल गूंज उठा।यह दृश्य देख भक्त भाव विभोर हो गये।महिलाओं ने पूरे मनोभाव से भगवान कृष्ण जन्मोत्सव पर जमकर नृत्य किया ।श्रोताओं ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में अपनी पूरी भक्ति भावना उडेल दिया।कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान भगवान सिंह राणावत ने परिवारजनों के साथ व्यास पीठ पर पौथी पूजन कर आरती की।
कन्हैया को माखन मिश्री, पंजेरी का लगाया भोग-
श्रीमद भागवत कथा प्रवचन के दौरान योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण को माखन-मिश्री,चरणामृत और पंजेरी प्रसाद का भोग लगाकर कथा आरती के पश्चात वितरण की गई। श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के दौरान समुद्र मंथन,सुखदेव मुनि,राजा परिक्षित, धनवंतरी,राजा अमरीश,राजा बलि, कपिल मुनी,भागीरथ, खटवांग, रामचरित मानस प्रसंग को संक्षिप्त रूप से वर्णन प्रतिपादित किया। प्रतिदिन श्रीमद भागवत कथा में बडी संख्या में श्रौताओं की भीड ज्ञान गंगा में गोते लगा रही हैं।प्रतिदिन श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन दोपहर 11रू30 बजे से शाम 4 बजे तक प्रवाहित किए जा रहे हैं।