नीमच। रंकावली माता जी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन गौनंदन पं विकास नागदा ने परीक्षित और शुकदेव का संवाद सुनाया। गौनंदन महाराज जी ने बताया कि मरणधर्मा व्यक्ति को भगवान की कथा श्रवण, कीर्तन और स्मरण करना चाहिए। सृष्टि का प्रादुर्भाव, हिरण्याक्ष वध और विदुर जी का प्रसंग सुनाया। विदुर विदुरानी के प्रसंग को सुनते ही श्रोता भाव विभोर हो गए। भगवान का भक्त के प्रति प्रेम देखकर श्रोता अपने अश्रु नहीं रोक पाए। कथा विश्राम के समय गौनंदन महाराज जी ने शिव पार्वती की के स्वरूप का वर्णन किया और कहा कि शिव पार्वती श्रद्धा और विश्वास का मूर्तिमंद स्वरूप है। भक्ति को यदि पुष्ट करना है तो शिव पार्वती की आराधना बहुत आवश्यक है। कथा विश्राम पर शिव विवाह की झांकी ने सबका मन मोह लिया। कथा सुनने के लिए अधिक से अधिक संख्या में भक्तजन दूर दूर से पधार रहे हैं।