नीमच। हाथों में तिरंगा व अलम और ज़ुबां पर दुआओं के साथ आज विश्व प्रसिद्ध दरगाह मोलाई फखरुद्दीन शहीद बाबजी मौला के दरबार गलियाकोट की जियारत के लिए नीमच से बोहरा समाज के युवा ज़ायरीनो का पैदल जत्था रवाना हुआ। इस पैदल जत्थे में 50 से अधिक नौजवान ज़ायरीन शामिल है।

बाबजी मौला की जियारत के लिए पांच दिवसीय पैदल यात्रा का उद्देश्य देश की तरक्की, अमन चैन और आपसी भाईचारे की मंगलकामनाएं है। पैदल जत्थे में शामिल लोगों के लबों पर यही दुआ थी कि दाऊदी बोहरा समाज के धर्मगुरु सैयदना डॉक्टर मुफद्दल सैफुद्दीन का जल्द से जल्द नीमच आगमन हो। साथ ही लोगों ने सैयदना साहब के दीर्घायु की कामना की। इस मौके पर बोहरा समाजजन ने हिंदुस्तान जिंदाबाद, सैयदना साहब जिंदाबाद और या बाब जी के नारों से नीमच की सड़कों को गूंजायमन कर दिया।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान के गलियाकोट स्थित पीर मौलाई फखरूद्दीन शहीद की दरगाह पर देश विदेश के कोने-कोने से बोहरा समाज के साथ ही सर्व समाज के लोग आस्था और श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। यहां श्रद्धालु मत्था टेक कर मन की मुराद मांगते है। आमतौर पर लोगों का पक्का यकीन है कि दिल से मांगी हुई हर मनोकामना यहां पर पूरी होती है। हर मुश्किल आसान हो जाती है। आज 50 से अधिक दाऊदी बोहरा समाज के नौजवान अपनी मनोकामनाओं लेकर नीमच की बोहरा कॉलोनी से रवाना हुए। पैदल जत्थे में शामिल यात्रियों का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। यह सफर 210 किलोमीटर लंबा है। गुरुवार को पैदल यात्री गलियाकोट दरगाह पर पहुंचकर ज़ियारत करेंगे। इस दौरान इनका मुकाम जीरन, प्रतापगढ़, गलियाकोट और परतापुर में रहेगा। नीमच से गलियाकोट के लिए ज़ायरीनो की यह आठवीं पैदल यात्रा है।

उल्लेखनीय है कि इस पैदल सफर की शुरुआत मात्र 3 नौजवानों के द्वारा की गई थी। समय के साथ-साथ पैदल यात्रियों की संख्या में इजाफा होता चला गया। यात्रा में मोहम्मद सैफी, मिकदाद हुसैन, बुरहान जीरन वाला, मुस्तफा पेटी वाला, फिदा हुसैन, हुजैफा डेरकी, मुफद्दल सादड़ी वाला, हुसैनी भाई गार्ड, मुस्तफा पेटी वाला, मुस्तफा जावद वाला, हातिम राणा, अली असगर साबुन वाला, अज़ीज़ राणा आदि शामिल है।
