चित्तौड़गढ़। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि योग के प्रायोगिक महत्व को समझने के लिए हमें भक्ति ज्ञान योग के महत्व को समझना होगा, तब ही हम स्थूल से सूक्ष्म की ओर यात्रा करते हुए प्राणायाम के माध्यम से ज्ञान मार्ग अपना पाएंगे।
डॉ सिंह शुक्रवार को श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय में राजस्थान संस्कृत अकादमी के सहयोग से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सभागार में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय योग संगोष्ठी में सारस्वत वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मन को संयमित करने का योग ही सक्षम माध्यम हैं। इंद्रियों का विषयों से वियोग होना ही योग हैं, जो योग के द्वारा संभव हैं। उन्होंने सभी का आह्वान किया कि आसन प्राणायाम ध्यान का अभ्यास कर सही मायने में योगी बने। इस अवसर पर जगतगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के योग विभागाध्यक्ष डॉ वंदना राठौड ने कहा कि योग पर कई शोध हुए हैं, मगर मन को नियंत्रित करने के लिए योगाभ्यास करने से तनाव से मुक्ति मिल सकती हैं। उन्होंने ध्यान योग को श्रेष्ठ मार्ग बताते हुए कहा कि गुरु द्वारा साधना की माला मिलने पर गंभीर से गंभीर रोगों से मुक्ति मिल सकती हैं। उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि योग की क्रिया से मानव स्वस्थ हो सकता हैं। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि रामप्रसाद मुंदड़ा ने वैदिक संस्कृति में योग की महता पर प्रकाश डालते हुए कहां कि देश के प्रथम वैदिक विश्वविद्यालय के रूप में कल्लाजी की प्रेरणा से स्थापित यह विश्वविद्यालय वेद, ज्योतिष व योग की शिक्षा के माध्यम से भारत को एक बार फिर विश्व गुरु बनाने में प्रयासरत हैं। उन्होंने शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वह दृढ़ संकल्प के साथ ज्ञानार्जन कर देश का नाम रोशन करें। विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन कैलाश मूंदड़ा ने समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए भक्ति योग के प्रति मूर्ति भक्त शिरोमणि मीरा, सबरी, हनुमान जी कल्लाजी के साथ अनेक महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर योग की प्रायोगिक शिक्षा प्राप्त कर ऐसे विद्वान बने ताकि कई लोग उनका अनुसरण कर सकें। दो दिवसीय संगोष्ठी के प्रथम दिवस केंद्रीय विश्वविद्यालय के योग विभाग के प्रोफेसर संजीब पात्रा, जो कि सारस्वत वक्ता के रूप में रहें। उन्होंने विभिन्न योग की विधाओं पर प्रकाश डाला। इस संगोष्ठी में देश-विदेश के कई शोध छात्र सम्मिलित हुए। लगभग 125 शोध पत्र प्राप्त हुए। यह शोध पत्र योग विभाग और विद्यार्थियों के लिए पथ प्रदर्शक होंगे। समापन सत्र के अंत में योग विभाग के विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान करने के साथ ही विश्वविद्यालय की ओर से अतिथियों को तुलसी, माला, ऊपरणा, स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।