आंतरी माताजी। सरस्वती शिशु मंदिर आंतरी माताजी में दस दिवसीय श्रीगणेश उत्सव का समापन शनिवार, 6 सितम्बर को बड़े ही हर्षाेल्लास और धार्मिक उत्साह के साथ हुआ। समापन अवसर पर प्रथम पूज्य सिद्धिविनायक श्रीगणेशजी की आरती में विशिष्ट अतिथि शंभूलाल राठौर (उन्नत किसान, आंतरी माताजी), शुभम राठौर (इलेक्ट्रिशियन मिस्त्री एवं विद्यालय के पूर्व छात्र) तथा कुलदीपसिंह चन्द्रावत (पूर्व छात्र, आंतरी माताजी) उपस्थित रहे।
अतिथियों का परिचय संस्था प्रधान बनवारीलाल मोड़ ने कराया, जबकि स्वागत आचार्य ललित धनगर और भैया तनमय लुनिया ने किया। अपने उद्बोधन में अतिथियों ने सरस्वती शिशु मंदिर की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कार, धर्म और संस्कृति का संरक्षण भी करती है। उन्होंने कहा कि उत्सव बच्चों में उत्साह भरते हैं और समाज को हमारी परंपराओं व तीज-त्योहारों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संस्कार और संस्कृति ऐसी अमूल्य धरोहर हैं जिन्हें खरीदा या परोसा नहीं जा सकता, बल्कि बच्चों के हृदयों में रोपकर सींचना पड़ता है। समापन अवसर पर श्रीगणेशजी का भोग पंकज (पुत्र प्रकाश राठौर) तथा प्रसाद दशरथ (पुत्र परशराम राठौर) की ओर से रखा गया। विशेष रूप से, दुर्घटनाओं से बचाव और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विद्यालय के भैया-बहनों द्वारा निर्मित पर्यावरण अनुकूल श्रीगणेश प्रतिमाओं का विसर्जन बाल्टी में किया गया।