नीमच। वृंदावन धाम मथुरा के प्रख्यात श्रीमद् भागवत उपासक श्री रमाकांत गोस्वामी महाराज ने कमल अग्रसेन भवन, नीमच में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में भक्तों को गहन आध्यात्मिक संदेश दिया। महाराज ने कहा, “भगवान प्रेम भाव के भूखे होते हैं, धन-संपत्ति के नहीं।
महाराज ने श्री कृष्ण की माखन लीला का उदाहरण देते हुए बताया कि गोपियों का प्रेम भगवान के लिए शुद्ध भक्ति का प्रतीक है। चोरी करना इस बात का संकेत है कि परमेश्वर औपचारिक भेंटों की प्रतीक्षा नहीं करते, बल्कि प्रेमपूर्वक और निष्कलंक हृदय से उमड़ती भक्ति को ही ग्रहण करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज जाति भेद भूलकर एकजुट रहे, तो राष्ट्र सशक्त बन सकता है।
प्रवचन में महाराज ने बताया कि भगवान कृष्ण, जो पूरे ब्रह्मांड के अधिपति हैं, माता यशोदा के प्रति वही वात्सल्य प्रेम दिखाते हैं जो संतान अपनी मां से करती है। यह निस्वार्थ और शुद्ध प्रेम बच्चों के आत्मबल और चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वृंदावन नाम भक्ति का आधार है, और यही कारण है कि श्री कृष्ण जीवन पर्यंत वृंदावन नहीं छोड़ते।
उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को व्यवहार, गृह कार्य और जीवन में आने वाली चुनौतियों के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए, जैसे अन्य देशों में बच्चे युवावस्था में जीवन के विभिन्न कार्य सीखते हैं। बच्चों को भगवान कृष्ण से प्रेरणा लेकर हर क्षेत्र में प्रतिभावान बनना चाहिए, तभी भारत विश्व गुरु के शिखर पर पहुंचेगा।
महाराज ने श्री कृष्ण की माखन लीला में हास्य और जीवन में हंसी का महत्व बताते हुए कहा कि जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। उन्होंने वृंदावन के महत्व, गोपियों के निश्छल प्रेम, ब्रजभाषा एवं श्री कृष्ण से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का विस्तृत विवरण भक्तों को सुनाया।
इस अवसर पर वैश्य सम्मेलन समाज इकाई के संभागीय अध्यक्ष संतोष चोपड़ा, युवा हृदय सम्राट मनोहर सिंह लोढ़ा, दिगंबर जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष जम्मू कुमार जैन, गोविंद पोरवाल, हरि बल्लभ मुछाल, तुषार लालका, वस्त्र व्यवसाय संघ के अध्यक्ष दिलीप मोगरा, सचिव दीपक शर्मा, शुभ प्रभात योग मित्र मंडल के शिव माहेश्वरी, दिलीप चौधरी, भरत जाजू, भारत विकास परिषद के रवि पोरवाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रतिदिन 22 से 28 दिसंबर तक दोपहर 2 से 6 बजे तक आयोजित की जा रही है। आचार्य श्री के प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं ने बालकृष्ण का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। इस आयोजन में श्री कृष्ण माखन लीला, श्री कृष्ण-यशोदा संवाद, राधा-गोपी संवाद, भगवान शंकर, विष्णु, कंस, ब्रह्मा और यमुना नदी सहित विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का महत्व प्रतिपादित किया गया।