सरवानिया महाराज। इस समय रबी सीजन की फसलें अच्छी खासी स्थिति में लहलहा तो रही हैं लेकिन कम ठंड के चलते फसलों की तबीयत भी नासाज़ बताई जा रही है। अंचल के किसानों ने गेहूं, लहसुन देशी व उटी लगाने के साथ साथ चिया सीड्स , मैथी व कही कही सरसों की फसल भी लगाई है। लहसुन में थीप्स की समस्या आ रही है जिसके चलते कृषकों द्वारा दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है। किसान खरपतवार नाशक दवाईयो के साथ साथ फसलों के पोषण हेतु पोषक तत्वों वाले खाद भी फसलों में दे रहे हैं।
पटवारी हल्का गादोला के ग्राम आमलीचक के किसान मदनलाल खिमा बंजारा ने खेत में करीब दो बिघा में रायड़ा की फसल को लगाया है जो बढ़िया स्थति में होकर इस समय पिले फूलों की बहार से सरोबार है। सरसों में इसके साथ ही फलियां में दाने बन रहे हैं। लगभग दो बार और पिलाई करने की जरूरत पड़ेगी। क्षेत्र में फिलहाल तो पानी का लेबल भी बढ़िया है। सरसों की फसल पटवारी हल्कों में बहुत कम मात्रा में दिखाई दे रही। हालांकि पिले फूलों की बहार के साथ ही सरसों पर मोयलें की आमद भी दिखाई देने लगी है।
बहुउद्देशीय कृषि दवाई केन्द्र प्रभारी रोहित धनगर ने बताया कि कुल कृषि रकबे में पन्द्रह से बीस प्रतिशत रायड़ा यानी कि सरसों की फसल लगाई गई है। अब धिरे धिरे फसल पर मोयलें ( एक तरह का किट) की मात्रा भी बढ़ने लगी है जिसपर स्प्रे व पावडर छिड़काव किया जा सकता है।
कम ठंड से फसलों में असंतुलन-
वर्तमान समय में ठंड कम मात्रा में पड़ रही है जिसके चलते बहुत सारी फसलों में असंतुलन बन रहा है , फसलों की तबीयत नासाज है। जिसके चलते गेंहू की फसल में बालियां बन रही है किसान राजू मालवीय का कहना है कि कम ठंड के चलते चिया की फसल गरमी के चलते खड़ी खड़ी सुख रही है और गेहूं की फसल में भी इस जलवायु का असर नजर आ रहा है। इस समय ठंड अगर थौड़ी जमकर पड़े तो फसलें अच्छी हो जायेगी अन्यथा उत्पादन प्रभावित होगा।