चित्तौड़गढ़। सत्संग मंडल की 31 साल से चल रही परंपरा के अनुसार शहर से इस बार भी गढ़बोर श्री चारभुजाजी पैदल यात्रा की शुरुआत हुई। इस वर्ष यात्रा में कुल 39 पदयात्री शामिल हुए। गांधीचौक से यात्रा का पहला पड़ाव झांतला माताजी तक लगभग 10 किलोमीटर के मार्ग पर 20 से अधिक स्थानों पर पदयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
यह परंपरा 1995 में नंदलाल ईनाणी, उद्धव दास रोगानी और दुर्गाशंकर शर्मा किलेवालों द्वारा बाराबंकी हार्डिया कोल जंगल में महाराज श्री परम् पूज्य स्वामी रामदास जी महाराज की प्रेरणा से शुरू की गई थी और यह अनवरत जारी है।
पदयात्रियों सहित अन्य श्रद्धालु गुरुवार सुबह 8 बजे गांधीचौक में एकत्र हुए। सभी ने मुरलीधर मंदिर में सामूहिक दर्शन कर भजन गाए और ठाकुरजी को रिझाया। मंदिर के बाहर आयोजित संक्षिप्त समारोह में पूर्व नगर परिषद चेयरमैन महेश ईनाणी, पार्षद हरीश ईनाणी, एडवोकेट सत्यनारायण ईनाणी, जयप्रकाश ईनाणी, माधव ईनाणी, मुरली ईनाणी, सुधीर समदानी, कन्हैया दास वैष्णव, ओमप्रकाश खटोड़ और रिटायर एडिशनल एसपी रतन खटीक सहित कई लोगों ने पदयात्रियों का अभिनंदन किया।
यात्रा का संचालन कर रहे सेना से रिटायर कैप्टन सुरेश ईनाणी ने यात्रा शेड्यूल और रूट की जानकारी दी। 84 वर्षीय सत्संग व्यवस्थापक उद्धवदास रोगानी और 64 वर्षीय भगवती प्रसाद शर्मा किलेवाल सहित कई श्रद्धालु लगातार 31वें वर्ष पैदल यात्रा में शामिल हुए।
गांधीचौक से रवानगी के साथ ही पदयात्रियों का स्वागत शुरू हुआ। मुकेश लोंगर ने बताया कि यात्रा में शामिल श्रद्धालु सफेद कुर्ता-धोती, सिर पर रंगीन पगड़ी और गले में दुपट्टा ओढ़े हुए हैं, जो इस यात्रा का पारंपरिक ड्रेस कोड है।
यात्रा का पहला पड़ाव कपासन मार्ग स्थित झांतला माताजी तक रहा, जहां लगभग 20 से अधिक स्थानों पर स्थानीय लोगों और संगठनों ने जत्थे का स्वागत किया। फूलों की चादर बिछाकर और भजनों के साथ पदयात्रियों का उत्साहवर्धन किया गया। बड़ी संख्या में परिजन और अन्य श्रद्धालु झांतला माताजी तक पदयात्रियों को विदा करने आए।
भोजन और विश्राम के बाद यात्रा दोपहर तीन बजे बनाकिया के लिए रवाना हुई। यात्रा में सत्यनारायण बाथरा, गोविंद लोंगड, श्याम ईनाणी, केदारमल काबरा, मुकेश लोंगड, दीपक तोषनीवाल, रतन सहित कुल 39 पदयात्री शामिल रहे।