वर्तमान आधुनिकता वाली जीवन शैली और बढ़ता भौतिकवाद शायद धरती के दूसरे भगवान को अपने कर्तव्यों से भटकने को ज्यादा ही मजबूर करने लगा है.... ऐसा लगता है.... ? वर्तमान भारत सरकार ने हमारे देश में निवासरत सीनियर सिटीजन और एक वर्ग जो गरीब की श्रेणी में होकर इलाज करने में असमर्थ हो उनके लिए आयुष्मान कार्ड के माध्यम से फ्री इलाज की सुविधा संपूर्ण देश में दी है, जिसका अनेक जगह तो सही उपयोग हो रहा है, लेकिन कुछ जगह इस योजना के माध्यम से भारी भ्रष्टाचार भी उजागर होने लगा है!
सरकार बुजुर्गों, गरीब बच्चों, लाडली बहनों, बेटियों के लिए अनेक योजनाएं बनाकर समाज के कल्याण का कार्य करने का प्रयास करती है, उसके लिए एक माध्यम नियुक्त होता है, जो कल्याणकारी योजनाओं को ध्यान में रखकर कार्य करने का कार्य करती है, लेकिन पैसे की चकाचौंध ने वर्तमान भगवान( चिकित्सक) को आज कहीं, कहीं शायद बड़े - बड़े नर्सिंग होम बनाने की दौड़ हो या लग्जरी गाड़ियां खरीदने की होड़ हो, या दवा कंपनियां के विदेश की ट्रिप का प्रलोभन हो, तभी तो अनेक चिकित्सकों द्वारा लिखी गई जीवन रक्षक दवाई सिर्फ उनके क्लीनिक के अंदर लगाए गए मेडिकल स्टोर पर ही मिलती है, (अगर वास्तव में डॉक्टर सेवा का माध्यम है तो अपने क्लीनिक में मेडिकल क्यों....) अन्य जगह नहीं , जबकि वर्तमान में सिर्फ हमारे नीमच शहर नहीं संपूर्ण देश में ऐसे अनेक मेडिकल स्टोर है जो दवाइयां पर 10% 20% और 30% तक एमआरपी से कम पैसा लेते हैं, क्या वह लोग गलत या नकली दवाई बेच रहे हैं.... ?
गत दिनों समाज के चौथे स्तंभ पत्रकार मीडिया जगत ने प्रमाण के साथ नीमच में आयुष्मान कार्ड होने के पश्चात भी मरीज के परिजनों से दवाइयां बाजार से मंगाई गई जो हजारों में है, क्या यह होना चाहिए या फिर इस प्रकार का कार्य सरकार के जन सेवा के कार्य को ठेंगा बताने वाला है, तकरीबन 90% लोग तो डर के कारण सामने भी नहीं आते, और अपनी जीवन भर की कमाई एक परिजन के बीमार पर आयुष्मान कार्ड होने के पश्चात भी खर्च कर देते हैं!
सुझाव तो यही देना बनता है की जिला प्रशासन समस्त आयुष्मान योजना के अंतर्गत आने वाले चिकित्सालय में एक अधिकारी के नंबर चस्पा करें, और उनको कोई समस्या हो तो उस नंबर पर शिकायत करें, ताकि वहां से उनका समाधान प्राप्त हो सके निवेदन चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करने वालों से भी है, कि आप भी अगर आपके यहां होने वाले इस प्रकार के कृत्य है अनभिज्ञ है तो तत्काल जानकारी में लेकर सेवा कार्य को सेवा ही रहने दें, ईश्वर की वैसे भी नीमच के चिकित्सकों पर असीम कृपा है!
दिलीप छाजेड़
जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति जिला नीमच