सरवानियां महाराज। अधर्म और बुराई चाहें कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो अंत में जीत सत्य अच्छाई और ईश्वर के प्रति अटूट आस्था की होती है। इसलिए हमारे मन में पनपने वाले अंहकार अधर्म अनगिनत बुराईयां मद मोह लालच और पाप को नाश करने और ईश्वर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता आस्था और धर्म में श्रृद्धा विश्वास को लेकर होलिका दहन किया जाता है , यह हमारी प्राचीन परंपरा है जिसका हम सभी धर्मावलंबी साल दर साल निर्वहन करते आ रहे हैं। भक्त प्रहलाद की ईश्वर में अटुट आस्था के चलते होलिका और हिरण्यकश्यप के अंहकार का अंत हुआ।
रियासत कालीन होली राजमहल के सामने दहन-
शहर में होली का पर्व मनाया जा रहा है इसके तहत सोमवार रात्रि को प्राचीनतम रियासतकालीन राजमहल के सामने चौक (राणावत मोहल्ला) पर परंपरागत तरीके से होली का दहन किया गया। इसके साथ ही शहर के अन्य हिस्सों में भी होली का दहन हुआ। सदर बाजार चारभुजा नाथ गली के घास भैरव चौक, सुथार गली में होली थड़ा चौक, मिडिल स्कूल के पास, हरिया भैरव चौक तथा पुरानी देव तलाई पर होली का दहन किया गया।
होली दहन में शहरवासियों ने उत्साह के साथ लकड़ियां घास फूस गोबर के बने हुए उपले तथा बडूलीये आदि अर्पित किए। विधि विधान से पुजा अर्चना कर अग्नि अर्पित की गई। इस दौरान कृषकों ने गेहूं धान की पकी हुई हरी गेंहू की बालियों को होली दहन की आग में सेंककर पहले भगवान को अर्पण किया बाद में उपयोग में लिया। लोगों ने श्रृद्धा से होली दहन के दोरान परिक्रमा कर शहर में सुख शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान स्थानीय पुलिस चौकी प्रभारी निलेश सोलंकी के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने सभी होली दहन वाले स्थानों पर नजर बनाए रखी। किसी भी प्रकार की अप्रीय स्थिति को नकारते हुए शहरवासियों ने शांति और सद्भाव के साथ होली दहन का पर्व मनाया ।