नीमच। जैन संत आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में 7 मार्च को सुबह 8 बजे स्थानीय टाउन हॉल में “एक मास एक उपवास” अभियान के अंतर्गत एक विशाल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में पतंजलि की टीम, बुद्धिजीवी वर्ग और विभिन्न समाजों के लोग शामिल होंगे, जो उपवास के महत्व और उसके लाभों पर विस्तृत जानकारी देंगे। कार्यक्रम में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा।
पत्रकारों से चर्चा में आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने बताया कि उन्होंने अहिंसा संस्कार पदयात्रा के माध्यम से अब तक लगभग 1 लाख 30 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी की है। इस पदयात्रा का उद्देश्य समाज में घटती नैतिकता, खोते हुए आदर्शों और लुप्त होती भारतीय परंपराओं को पुनर्जीवित करना है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में अनियमित खानपान और असंतुलित जीवनशैली से लोगों के स्वास्थ्य और विचारों में विकृति तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में उपवास एक सशक्त और प्रभावी उपाय है, जो शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही मन के विकारों को दूर करता है और इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित करता है।
आचार्य श्री ने बताया कि उनके अभियान से प्रेरित होकर पहले ही दिन साढ़े पांच लाख से अधिक लोगों ने उपवास रखा था। “एक मास एक उपवास” अभियान के तहत अब तक दिल्ली, गुड़गांव और जयपुर में बड़े आयोजन संपन्न हो चुके हैं, जबकि नीमच में यह चौथा बड़ा कार्यक्रम होगा। उन्होंने इंटरनेशनल फास्ट डे मनाए जाने की भी मांग की और सर्व समाज से इस अभियान में जुड़ने की अपील की।
इस अवसर पर उपाध्याय पीयूष सागर जी महाराज और सागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य एक गंभीर विषय बन चुका है। प्राचीन सभ्यता और संतुलित जीवनशैली से दूर होने के कारण यह समस्या और गहरी हो गई है। उपवास से शरीर में कई सकारात्मक परिवर्तन होते हैं।
उल्लेखनीय है कि आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज अब तक 6000 से अधिक उपवास कर चुके हैं। उन्होंने संदेश दिया कि उपवास केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी अपनाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन अजय कासलीवाल द्वारा किया जाएगा।