नीमच। सिद्धेश्वर महादेव मंदिर एवं कॉलोनी वासियों के तत्वावधान में श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित शिव महापुराण गंगा महोत्सव में भगवान श्री गणपति का विवाह उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। कथा में जैसे ही श्री गणपति सिद्धि-रिद्धि विवाह प्रसंग आया, पूरा पंडाल “जय गणेश, जय गणेश” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने गणपति स्वरूप के दर्शन किए। व्यासपीठ पर विराजित कथा पंडित मनोहर नागदा ने गणपति विवाह प्रसंग सुनाते हुए भगवान गणेश की लीलाओं का वर्णन किया।
पंडित नागदा ने बताया कि भगवान गणेश ने धर्म की हानि और सामाजिक एकता के भंग होने पर अवतार लेकर धर्म और न्याय की पुनर्स्थापना की। उन्होंने कहा “हम एक थे, हम एक हैं, और एक रहेंगे। शरीर के अंग पृथक होकर भी एक हैं, सृष्टि के जीव भिन्न होकर भी अभिन्न हैं। जन्मदाता, पालनकर्ता और संहारक एक ही हैं। शक्तियां अनेक हैं, फिर भी परमशक्ति एक है।”
कथा में उन्होंने विघ्नहर्ता गणेश जी के भक्त प्रेम का भी वर्णन किया और बताया कि गणपति का विवाह सिद्धि और बुद्धि से होता है, जिससे शुभ लाभ प्रकट होते हैं। पंडित ने यह भी कहा कि धर्म के 10 लक्षणों का पालन करने से धर्म हमारी रक्षा करता है। कथा में वासुकी नाग, अर्धनारीश्वर, नंदी की सवारी और गणपति विवाह सहित विभिन्न धार्मिक एवं नैतिक विषयों का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्व भी प्रतिपादित किया गया।
कार्यक्रम का समापन शिव पुराण पोथी पूजन और आरती के साथ हुआ और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।