सरसी। रतलाम जिले के सरसी गांव में इन दिनों भक्ति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। सप्त दिवसीय चूल तेरस महा महोत्सव का भव्य समापन मंगलवार को राजा हनुमान मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास के साथ हुआ। अंतिम दिन का माहौल दिवाली जैसे बड़े पर्व से कम नहीं रहा, जहां हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
सात दिनों तक चले इस महोत्सव में रामकथा, नानी बाई का मायरा, भजन संध्या, भव्य शोभायात्रा, 56 भोग, रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर जैसे कई धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। आयोजन संकल्प पंच ग्राम सरसी के तत्वावधान में किया गया था। महोत्सव की शुरुआत 11 मार्च को गुरुदेव के नगर प्रवेश के साथ हुई थी, वहीं प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था भी की गई।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘चूल’ की प्राचीन परंपरा रही। बुधवार शाम करीब 6 बजे धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलने की रस्म निभाई गई, जिसमें भक्तों ने अग्नि पर चलकर अपनी आस्था का प्रदर्शन किया। मान्यता है कि बालाजी महाराज की कृपा से अंगारों पर चलने के बावजूद भक्तों को कोई नुकसान नहीं होता।
चूल के बाद दिल्ली के मोंटी नटराजन ग्रुप द्वारा धार्मिक लीलाओं पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पंडाल में पहुंचे। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए यहां “अर्जी” लगाते हैं और विश्वास करते हैं कि बालाजी महाराज स्वयं न्याय कर कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं।
पूरे आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन भी मुस्तैदी से तैनात रहा और व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा।