कालापीपल। नगर में हिंदू नव वर्ष गुड़ी पड़वा का पर्व इस वर्ष सरस्वती विद्या मंदिर में बड़े ही पारंपरिक, श्रद्धा और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में आचार्य, दीदियों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेकर नव संवत्सर का स्वागत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल विद्यालय के समस्त आचार्य दीदियों द्वारा सूर्य देव को सामूहिक अर्घ्य अर्पित कर की गई। इसके पश्चात विधिवत गुड़ी का निर्माण कर उसकी पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक गरिमा का विशेष वातावरण देखने को मिला।
आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य गौरीशंकर खत्री तथा वरिष्ठ दीदी दीपा सेन ने हिंदू नव वर्ष के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुड़ी पड़वा से विक्रम संवत् का शुभारंभ माना जाता है। यह पर्व नई ऊर्जा, नई आशा और सकारात्मक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है, जो भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश देता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य प्रवीण देशपांडे ने की।
वहीं अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में मुख्य वक्ता के रूप में भीमसिंह परमार ने संबोधन दिया तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी राजेंद्र देशमुख द्वारा की गई। इस अवसर पर विद्यालय भवन पर विधिवत ध्वज पूजन कर भगवा ध्वजा स्थापित की गई, जिससे पूरे आयोजन का वातावरण और भी गरिमामय बन गया।
इसके पश्चात विद्यालय की बालिकाओं एवं आचार्यगणों द्वारा नगर के प्रमुख स्थानों पर पहुंचकर स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों को तिलक लगाकर तथा नीम और मिश्री का वितरण कर नूतन संवत्सर की शुभकामनाएं दी गईं। जब शिशु मंदिर के आचार्यों द्वारा नगरवासियों को तिलक लगाकर शुभकामनाएं दी जा रही थीं, तब लोगों ने इस पहल की खुलकर सराहना की और इसे भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने वाला सराहनीय प्रयास बताया।
इस आयोजन के माध्यम से सरस्वती विद्या मंदिर परिवार ने न केवल विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य किया, बल्कि पूरे नगर में हिंदू नव वर्ष के महत्व और भारतीय परंपराओं के प्रति जागरूकता का संदेश भी प्रभावी रूप से पहुंचाया।