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March 21, 2026, 4:43 pm
KHABAR : आध्यात्म और विकास के संगम से बन रहा नया भारत, योगेश राजोरा ने कहा- सनातन परंपराएं केवल अतीत नहीं, आधुनिक भारत के निर्माण की प्रेरक शक्ति, पढ़े खबर 

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नीमच। भारत की सनातन परंपराएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण की प्रेरक शक्ति हैं। भारत सरकार द्वारा देश की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार “विरासत भी, विकास भी” के मंत्र के साथ देश के भौतिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सशक्त करने का कार्य कर रही है।

हाल के समय में देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों के विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के प्रवास को ‘शक्ति’ और ‘भक्ति’ के संगम के रूप में देखा जा रहा है। इन प्रवासों ने यह संदेश दिया है कि विकसित भारत का संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी जड़ें भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में भी गहराई से जुड़ी हुई हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का वृंदावन प्रवास और संत परंपरा से जुड़े महात्माओं से भेंट को भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। यह दर्शाता है कि देश का सर्वाेच्च संवैधानिक पद भी आध्यात्मिक मार्गदर्शन और संत परंपरा के प्रति श्रद्धा रखता है। ऐसे प्रसंग इस बात को स्पष्ट करते हैं कि भविष्य का भारत केवल भौतिक उन्नति ही नहीं, बल्कि आंतरिक शांति, सेवा और मानवीय मूल्यों पर आधारित होगा।

इसी क्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के नागपुर प्रवास और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर दिए गए वक्तव्य को भी राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने समाज में अनुशासन, सेवा और चरित्र निर्माण को राष्ट्र की प्रगति के लिए आवश्यक बताया।

केंद्र सरकार द्वारा देश के प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन का महाकाल लोक, और अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण एवं विकास कार्यों के माध्यम से देश की प्राचीन आस्था स्थलों को नया स्वरूप दिया गया है। इसके साथ ही केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के पुनर्विकास कार्यों से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।

सरकार द्वारा प्रसाद योजना के तहत देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया गया है, वहीं स्वदेश दर्शन 2.0 के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त किया जा रहा है। इसके अलावा विदेशों में तस्करी कर ले जाई गई सैकड़ों प्राचीन मूर्तियों और पुरावशेषों को वापस लाकर उनके मूल स्थानों पर स्थापित करने का कार्य भी किया गया है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

आयुष मंत्रालय के माध्यम से योग और आयुर्वेद जैसी प्राचीन भारतीय स्वास्थ्य पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई गई है। पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और शोध कार्यों के माध्यम से भारत विश्व को स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दे रहा है। इसके साथ ही प्राचीन ग्रंथों और हस्तलिपियों के संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी रहें।

लेखक योगेश राजोरा, नीमच के अनुसार, आधुनिकता और सनातन परंपरा के बीच संतुलन ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। भारत अपनी जड़ों से जुड़े रहकर ही विश्व में नेतृत्व कर सकता है, और यही मार्ग आने वाले समय में देश को नए स्वर्णिम युग की ओर ले जाएगा।
 

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