चित्तौड़गढ़। नवरात्रि की पंचमी तिथि को स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। देश के कई भागों, विशेषकर दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय एवं स्कंदमाता की पूजा श्रद्धा और उत्साह के साथ की जाती है, वहीं उत्तर भारत में वाराणसी, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ स्थानों पर स्कंदमाता की आराधना होती है।
राजस्थान में निंबाहेड़ा स्थित श्री कल्लाजी वेदपीठ को स्कंदमाता के दर्शन का विशेष स्थल माना जाता है। यहां पंचदेवों के मध्य सिंहवाहिनी स्कंदमाता की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित है, जिसकी पूजा-अर्चना के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
नवरात्रि की पंचमी के अवसर पर वेदपीठ में स्कंदमाता का विशेष श्रृंगार, पूजन और अनुष्ठान किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। मान्यता है कि स्कंदमाता की आराधना से संतान सुख की प्राप्ति होती है, इसलिए विशेष रूप से महिलाएं श्रद्धा के साथ माता की पूजा करती हैं।
आज पंचमी के अवसर पर वेदपीठ में स्कंदमाता की विशेष आराधना एवं अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने की संभावना है।