BREAKING NEWS
BIG NEWS : बछड़े को बचाने दौड़ा किसान, खुले बिजली.. <<     NEWS : निर्वाचन से पहले अलर्ट, चुनावी तैयारियां.. <<     NEWS : शंभूपुरा की संध्या चौपाल में सुनीं.. <<     BIG NEWS : बाबा सांवलिया सेठ के दर्शन की लालसा लिए.. <<     BIG NEWS : सोशल मीडिया पर पिस्टलनुमा हथियार के साथ.. <<     BIG REPORT : पुलिया पार करते समय तेज बहाव में बहे दो.. <<     KHABAR : बम-बम भोले के जयघोष के साथ 21वीं विशाल पैदल.. <<     NEWS : सेवा का संकल्प हुआ और मजबूत, अन्नपूर्णा.. <<     BIG NEWS : 22 वर्ष तक देश सेवा करने वाले सैनिक.. <<     श्रावण की पावन बेला में उमड़ा आस्था का सैलाब,.. <<     BIG REPORT : आंगनवाड़ी केंद्र में गंदे पानी का मामला,.. <<     BIG NEWS : मंदसौर जिले का मानपुर गांव और मुखबिर की.. <<     KHABAR : श्रावण सोमवार व मोहर्रम को लेकर शांति.. <<     BIG NEWS : पुलिस मुठभेड़ में हिस्ट्रीशीटर घायल, अवैध.. <<     स्वच्छ भारत मिशन की उड़ी धज्जियां, बिस्टान के.. <<     BIG NEWS : आधी रात अनाज की दुकान में शॉर्ट सर्किट से.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
April 11, 2026, 5:26 pm
KHABAR : गरोठ-बोलिया में फुल माली समाज ने मनाई महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती, शिक्षा ही समानता और न्याय की सबसे बड़ी कुंजी, पढे़ कमलेश प्रजापति की खबर 

Share On:-

गरोठ। आज फुल माली समाज द्वारा महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाजजनों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महात्मा फुले ने अपना संपूर्ण जीवन महिलाओं, दलितों और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। वे शिक्षा के प्रबल समर्थक थे और मानते थे कि शिक्षा ही समानता और न्याय की सबसे बड़ी कुंजी है।

उन्होंने वर्ष 1848 में पुणे में अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर देश का पहला बालिका विद्यालय शुरू कर समाज में शिक्षा की अलख जगाई। उस दौर में यह कदम सामाजिक क्रांति का प्रतीक बना।

महात्मा फुले ने जातिवाद, छुआछूत और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाते हुए सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसके माध्यम से समाज में समानता और न्याय की भावना को बढ़ावा दिया।

वक्ताओं ने बताया कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए वे शिक्षा को अनिवार्य मानते थे। उनके महान कार्यों और समाज सुधार के प्रति समर्पण को देखते हुए वर्ष 1888 में उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और सभी ने उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE