चित्तौड़गढ़/विजयपुर। रामस्नेही सम्प्रदाय के संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तत्व का मर्म समझाकर जीवन को पापों से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करने वाला पावन ग्रंथ है।
वे धर्मनगरी विजयपुर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के प्रथम दिवस पर व्यासपीठ से कथा वाचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत से ही राजा परीक्षित के सभी भ्रम दूर हुए थे। भागवत वक्ता के वैरागी और श्रोता के प्रभु अनुरागी होने पर ही भक्ति की सरिता प्रवाहित होती है।
भागवत कथा का महत्व समझाया-
संत दिग्विजयराम ने प्रथम श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान का स्वरूप सत्-चित् है, जिनके दर्शन मात्र से दैहिक सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने भगवान शिव द्वारा पार्वती को अमर कथा सुनाने तथा शुकदेव द्वारा उसका श्रवण करने सहित विभिन्न पौराणिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जीव के दो शत्रु नींद और निंदा हैं, जिन पर विजय पाने से ही भक्ति और मोक्ष संभव है। भक्ति के दो पुत्र ज्ञान और वैराग्य हैं, जिनके माध्यम से आत्मिक उत्थान संभव होता है।
भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश-
संत ने गोकर्ण और धुंधकारी का प्रसंग बताते हुए कहा कि गोकर्ण के ज्ञान से धुंधकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते रहे।
कलश यात्रा और शोभायात्रा से माहौल भक्तिमय-
इस अवसर पर नृसिंह मंदिर से कथा स्थल तक भव्य शोभायात्रा एवं कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। 65 गांवों से आई हरिबोल प्रभात फेरियों ने भजन-कीर्तन के साथ यात्रा को आकर्षक बनाया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। यात्रा में भगवान लक्ष्मी नाथ और नृसिंह नाथ की बग्गी के साथ संत दिग्विजयराम महाराज भी विराजमान रहे।
श्रद्धालुओं की रही बड़ी भागीदारी-
महोत्सव में मुंदड़ा परिवार सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने व्यासपीठ का पूजन कर संत से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के समापन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया।