नीमच। आसमान में बादल तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन खेतों को जिस झमाझम बारिश का इंतजार है, वह अब तक पूरी नहीं हो सकी है। मानसून की बेरुखी ने नीमच जिले के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से सोयाबीन और मूंगफली की फसल प्रभावित होने लगी है। जिले में अब तक हुई बारिश पिछले वर्ष की तुलना में करीब आधी रह गई है। ऐसे में किसानों को अब आगामी दिनों में होने वाली बारिश से ही उम्मीदें हैं।
जिले में अब तक महज 22.5 इंच बारिश-
नीमच जिले में औसत वार्षिक बारिश का आंकड़ा करीब 32.5 इंच है। चालू वर्षा काल में अब तक जिले में करीब 22.5 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं पिछले वर्ष इसी अवधि तक जिले में करीब 41 इंच बारिश हो चुकी थी। यानी इस बार पिछले वर्ष की तुलना में बारिश का आंकड़ा काफी पीछे चल रहा है। विकासखंडवार की स्थिति देखें तो नीमच में अब तक 23.4 इंच, जावद में 21.2 इंच और मनासा में 19.5 इंच बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी का सीधा असर खेतों में खड़ी फसलों पर दिखाई देने लगा है।
बारिश नहीं हुई तो फसल पर पड़ेगा बड़ा असर-
भोलियावास के किसान देवीलाल धाकड़ ने बताया कि पर्याप्त बारिश नहीं होने से सोयाबीन और मूंगफली की फसल प्रभावित हो रही है। पानी की कमी के साथ कीट-व्याधि और जंगली सुअरों के कारण भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में सबसे अधिक रकबा सोयाबीन और मूंगफली की फसल का है, ऐसे में बारिश की कमी का असर बड़ी संख्या में किसानों पर पड़ सकता है।
आगामी दिनों में नहीं हुई वर्षा तो प्रभावित होगा उत्पादन-
किसानों का कहना है कि यदि आगामी दो दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो करीब 50 प्रतिशत फसल को बचाया जा सकता है, लेकिन यदि लगातार करीब सात दिन तक बारिश नहीं हुई तो उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होकर करीब 20 प्रतिशत तक ही रह सकता है। यही वजह है कि किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। किसानों ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन में भारी गिरावट के साथ आर्थिक संकट की स्थिति भी बन सकती है।
शहर में भी जलसंकट की चिंता-
बारिश की कमी का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। नीमच शहर में भी जलस्रोतों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि नगर पालिका के जिम्मेदारों का कहना है कि फिलहाल शहर में जलसंकट की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। नगर पालिका अधिकारियों के अनुसार ठिकरिया डेम से पूरे साल में करीब 5 एमसीएम तक पानी लिया जा सकता है। वर्तमान में ठिकरिया डेम से करीब 2 एमसीएम पानी लिया जा चुका है। इसके अलावा जाजू सागर बांध में उपलब्ध पानी से भी फिलहाल शहर की पेयजल व्यवस्था संचालित की जा सकती है।
जाजू सागर बांध भी पिछले साल से पीछे-
नीमच शहर के प्रमुख जलस्रोत जाजू सागर बांध की कुल क्षमता करीब 21 फीट है। वर्तमान में बांध में करीब 15 फीट पानी उपलब्ध है। पिछले दस दिनों में बांध के जलस्तर में करीब एक फीट की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक जाजू सागर बांध में करीब 19 फीट पानी पहुंच चुका था। इस लिहाज से इस बार बांध भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी पीछे है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उपलब्ध जल से शहर की जरूरत पूरी की जा सकती है, लेकिन यदि आगामी दिनों में बारिश नहीं हुई तो जलसंकट जैसे हालात बनने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अगले चार दिन बारिश की उम्मीद-
बारिश की कमी के बीच मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने किसानों और आमजन को कुछ राहत की उम्मीद दी है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में प्रदेश के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। नीमच सहित भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की से तेज बारिश हो सकती है। वहीं अगले चार दिनों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। इससे बारिश के आंकड़ों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से मिलेगी राहत?
आईएमडी (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र और ट्रफ के प्रभाव से 4 सितंबर तक जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज बारिश होने की संभावना है। यदि मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान सही साबित होता है और नीमच जिले में भी अच्छी बारिश होती है, तो किसानों को काफी राहत मिल सकती है। फिलहाल किसानों की नजर आसमान पर टिकी है। आने वाले कुछ दिन न केवल खेतों में खड़ी सोयाबीन और मूंगफली की फसल के लिए बल्कि जिले के जलस्रोतों के भविष्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।