चित्तौड़गढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के निंबाहेड़ा सेवा केंद्र पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भक्तिभाव और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सेवा केंद्र प्रभारी बीके शिवली दीदी ने उपस्थित भाई-बहनों को जन्माष्टमी के आध्यात्मिक रहस्य की जानकारी दी।
बीके शिवली दीदी ने कहा कि श्रीकृष्ण इस सृष्टि के प्रथम सर्वगुण संपन्न, 16 कला संपूर्ण और निर्विकार आत्मा माने जाते हैं। वे प्रथम देवता के रूप में इस धरती पर अवतरित होते हैं और उनके समय की धरती को स्वर्ग कहा जाता है, जहां सभी आत्माओं को सुख और शांति की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि भक्ति मार्ग में श्रीकृष्ण को सदैव मक्खन खाते और दूसरों को खिलाते हुए दर्शाया जाता है। वास्तविकता में मक्खन संपन्नता का प्रतीक माना गया है। यह संदेश देता है कि श्रीकृष्ण के आगमन के समय धरती सर्व प्रकार से संपन्न होती है।
बीके शिवली दीदी ने कहा कि श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व में राजनीतिक, प्रशासनिक और धार्मिक कुशलता के साथ अनेक गुणों का समावेश दिखाई देता है। उन्होंने जीवन की विभिन्न परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना प्रसन्नचित्त होकर किया। उनकी पवित्रता और आत्मिक शक्ति का प्रभाव उनके आसपास रहने वाली आत्माओं पर भी पड़ता था।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व में शारीरिक सुंदरता, आरोग्यता, आत्मिक बल, पवित्रता और श्रेष्ठ गुणों का अद्भुत समन्वय था। जन्माष्टमी के अवसर पर सभी को संकल्प लेना चाहिए कि केवल श्रीकृष्ण की पूजा ही नहीं, बल्कि उनके गुणों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास भी करें।
राधा-कृष्ण के रूप में सजे बच्चे-
कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने श्रीकृष्ण और राधा का रूप धारण कर सभी का मन मोह लिया। समाजसेवी एकता मराठा एवं रतना बहन भी राधा-कृष्ण के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुईं। सेवा केंद्र के भाई-बहनों ने गीत, संगीत, कविता, भजन और नृत्य की प्रस्तुतियां देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में मटकी फोड़ प्रतियोगिता आयोजित की गई और उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।