नीमच। अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को श्रीरामलला के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर देशभर में गूंजने वाली रामधुन को इंदिरा नगर स्थित मंशापूर्ण महादेव-रणजीत हनुमान मंदिर रामधुन मंडल ने उसी दिन से अखंड रूप प्रदान करते हुए प्रतिदिन जारी रखा है। मंडल द्वारा प्रतिदिन प्रभात फेरी के माध्यम से रामनाम संकीर्तन किया जाता है। इसी क्रम में समय-समय पर धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सनातन संस्कृति से जुड़े आयोजन भी किए जाते हैं।
इसी धार्मिक श्रृंखला के तहत रविवार, 6 सितंबर 2026 को मां त्रिपुरा सुंदरी, बांसवाड़ा के दरबार में विशाल धार्मिक यात्रा आयोजित की जा रही है। यात्रा में पांच बसों के माध्यम से करीब 300 रामभक्त शामिल होंगे। इनमें मातृशक्ति, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे भी सहभागी होंगे।
प्रभात फेरी के बाद शुरू होगी यात्रा-
यात्रा का शुभारंभ रविवार सुबह रामधुन प्रभात फेरी के साथ होगा। इसके बाद सभी श्रद्धालु मंशापूर्ण महादेव एवं रणजीत हनुमान मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ और बालाजी महाराज की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लेंगे। इसके बाद पांच बसों से मां त्रिपुरा सुंदरी के दरबार के लिए प्रस्थान करेंगे। यात्रा का मार्ग नीमच से हड़कियाखाल, जीरन, प्रतापगढ़ होते हुए बांसवाड़ा स्थित मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर तक रहेगा। पूरे मार्ग में रामनाम संकीर्तन एवं भजन-कीर्तन किया जाएगा।
भजन संध्या और 56 भोग रहेगा आकर्षण-
रामधुन मंडल की ओर से यात्रा में शामिल सभी श्रद्धालुओं के लिए दो समय के भोजन सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। मां त्रिपुरा सुंदरी के दरबार में पहुंचने के बाद प्रसिद्ध भजन गायक विनोद राठौर एवं धर्मू प्रजापत और उनकी भजन मंडली द्वारा भक्ति संगीत की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।
यात्रा का विशेष आकर्षण मां त्रिपुरा सुंदरी को 16 श्रृंगार एवं 56 भोग अर्पित करना रहेगा। इसके लिए अलग-अलग थालियां तैयार की जा रही हैं। पूजा-अर्चना के बाद रामभक्त देशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति, स्वास्थ्य एवं मंगलमय जीवन की कामना करेंगे। धार्मिक कार्यक्रमों के समापन के बाद रात्रि में सभी करीब 300 रामभक्त पुनः नीमच के लिए रवाना होंगे।
रामनाम और सनातन संस्कार का संदेश-
रामधुन मंडल का उद्देश्य धार्मिक यात्रा के साथ रामनाम, सनातन संस्कार, धार्मिक चेतना और सामाजिक एकता की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। यात्रा प्रभारी मनीष चौधरी एवं यात्रा संयोजक प्रदीप शर्मा ने बताया कि मां त्रिपुरा सुंदरी की यह यात्रा पूरी तरह धार्मिक एवं आध्यात्मिक भावना से प्रेरित है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक रामभक्तों को जोड़कर भक्ति, संस्कार और सनातन संस्कृति की भावना को मजबूत करना है।