जावरा। क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के किसान इन दिनों नीलगाय के आतंक से परेशान हैं। किसानों के खेतों में खड़ी फसलों को आए दिन नीलगायों द्वारा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। किसान नीलगायों की समस्या को हल करने और इससे निजात दिलाने के लिए कई मर्तबा शासन-प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं लेकिन प्रशासन द्वारा अब तक इस समस्या के हल के लिए किसी भी प्रकार का सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।
जावरा के ग्रामीण क्षेत्र सरसी, केरवासा, उपलाई, भूतेडा, सादाखेड़ी, नीमन, डोडियाना, पाताखेड़ी, रेवास, बड़ायला, सहित आसपास के करीब एक दर्जन गांव के खेतों में नीलगाय ने स्थाई अपना रेन बसेरा बना लिया है। रात के अंधेरे में झुंड के झुंड नील गाय खेत में खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, इससे किसानों को काफी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। किसान रात रात जाकर अपने खेतों में फसल की रखवाली कर रहे हैं। जंगली पशु होने के कारण किसान उन्हें भगाने में भी असफल हो रहा है।
सरसी के किसान सोहनलाल मेहता, विनोद पटेल, काशीराम बंबोरिया, आसपास के किसानों ने बताया कि नीलगाय की समस्या निरंतर बढ़ती जा रही है। नीलगाय से फसलों को बचाने के लिए किसान कई प्रकार के जतन कर रहे हैं, उसके पश्चात भी किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि किसान जब नील गायों के झुंड को भगाने की कोशिश करता है तो हिंसक होकर किसानों पर हमला कर घायल भी कर रहे हैं। अभी कुछ वर्षों में नील गायों की संख्या बहुत ज्यादा हो गई है। यह झुंड बनाकर खेतों में घुस जाते हैं और फसलों को पूरी तरह से चौपट कर देते हैं।
वहीं प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा तो फसल बीमा का अपनी अदा कर देती है लेकिन नीलगाय के रोने से फसलों की बर्बादी का मुआवजा फसल बीमा के भी प्रावधान में नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र के किसानों का कहना है कि नील गायों की नसबंदी करा कर इनकी बढ़ती संख्या को रोका जाए एवं किसानों ने शासन-प्रशासन से जल्द ही इस ओर ध्यान आकर्षित करने की बात कही।